जब हम एक पूर्ण संत के सत्संग में बैठते हैं, तो उनकी आँखों से हमारी आँखों तक, उनके हृदय से हमारे हृदय तक, उनकी आत्मा से हमारी आत्मा तक प्रेम ही प्रेम पहुँचता है। — संत राजिन्दर सिंह जी महाराज