जब तक हम प्रेम को भूले रहेंगे, तब तक हम प्रभु से दूर रहेंगे। प्रभु के साथ अपनी दूरी को मिटाने के लिये हमें प्रेम को धारण करना होगा, जोकि प्रभु का व्यक्त स्वरूप है। — संत राजिन्दर सिंह जी महाराज