अपना ध्यान प्रभु की ओर लगायें
डैल्टा होटल टोरौन्टो एयरपोर्ट कॉन्फ़्रैंस सेंटर में बोलते हुए संत राजिन्दर सिंह जी महाराज ने अंतर्राष्ट्रीय श्रोताओं को समझाया कि हमें अपने मानव जीवन की सच्चाई को समझने का प्रयास करना चाहिए। हम अपना पूरा जीवन इस भौतिक संसार को समझने और यहाँ तरक्की करने की कोशिश में ही बिता देते हैं, तथा ज़िंदगी के उतार-चढ़ाव में ही फँसे रहते हैं। इस भौतिक जीवन के तमाशे में फँसकर, हम इस मानव चोले में मिले अनमोल समय को व्यर्थ ही गँवा देते हैं। ये मानव चोला हमारी आत्मा के लिए एक सुनहरा अवसर है जिसमें वो प्रभु के धाम वापस पहुँच सकती है, जोकि आत्मा का सच्चा घर है। महाराज जी ने समझाया कि इस अवसर से पूरा-पूरा लाभ उठाने के लिए, हमें पहले आत्मा के रूप में ख़ुद को जानना होगा, और ये पहचानना होगा कि हम परमात्मा का अंश हैं। ये अनुभव हमें तब होता है जब हम आंतरिक आध्यात्मिक यात्रा पर जाते हैं। इसके लिए, हमें अपने ध्यान को बाहरी माया के संसार से हटाना होगा, और उसे ध्यानाभ्यास के द्वारा आंतरिक रूहानी मंडलों में एकाग्र करना होगा।
जब हम इस अंदरूनी यात्रा पर जाते हैं, तो हम प्रभु के प्रेम व प्रकाश के साथ जुड़ जाते हैं, और अपने सच्चे स्वरूप को जान जाते हैं। एक बार जब हमें प्रभु-प्रेम का सीधा अनुभव हो जाता है, तो हमें अपने जीवन में हर पल प्रभु की उपस्थिति का अनुभव होने लगता है। ये अनुभव हमारे सभी दुख-दर्द को दूर कर देता है, जिस तरह प्रकाश समस्त अंधकार को दूर कर देता है। हमारी ज़िंदगी से चिंता और डर मिट जाते हैं, और हम जीवन के उतार-चढ़ाव का सामना शांति और संतुलन के साथ कर पाते हैं, ये जानते हुए कि प्रभु हर पल हमारा हाथ थामे हुए हैं।