ध्यानाभ्यास के द्वारा द्वैत के संसार से जाग उठना

फ़रवरी 22, 2024

संत राजिन्दर सिंह जी महाराज ने दिल्ली के दक्षिण-पूर्व में करीब 3000 मील की दूरी पर स्थित गोवा राज्य के एक विशाल इंडोर स्टेडियम में सत्संग फ़र्माया (21-22 फरवरी)। अनंत काल से मानवता द्वारा शांति और ख़ुशी की तलाश का ज़िक्र करते हुए महाराज जी ने फ़र्माया कि जो शांति औैर ख़ुशी हम इतने समय से बाहर खोज रहे थे, वो असल में हमारे भीतर ही है।

कार्यक्रम के दौरान महाराज जी ने फ़र्माया कि ध्यानाभ्यास के द्वारा हम उन आंतरिक खज़ानों के साथ जुड़ सकते हैं जो हमें स्थाई ख़ुशी प्रदान करेंगे। जो कुछ हम बाहर ढूंढ रहे हैं, वो हमारे भीतर ही है। जो स्थाई ख़ुशी हम ढूंढ रहे हैं, वो बौद्धिक, शारीरिक, या भावनात्मक लाभों से नहीं पाई जा सकती। सच्ची शांति तभी मिलती है जब हम प्रभु के साथ अपनी नज़दीकी का अनुभव कर लेते हैं।

जब हम ध्यानाभ्यास में प्रभु के प्रेम का अनुभव करते हैं, तो हमारे अंदर एक ज़बरदस्त बदलाव आता है। हम द्वैत से निकलकर एकता की दुनिया में जागृत हो उठते हैं, जहाँ हम प्रभु की समस्त सृष्टि को अपना ही मानकर गले से लगा लेते हैं। अपने सच्चे आत्मिक स्वरूप को पहचानने से हमारा नज़रिया भी बदल जाता है, क्योंकि हम बाहरी दुनिया की धन-दौलत इकट्ठा करने को प्राथमिकता देने के बजाय आध्यात्मिक क्षेत्र में तरक्की करना चाहते हैं। हम अपने शरीर, मन, और बुद्धि को पोषित करने को प्राथमिकता देने के बजाय अपनी आत्मा को पोषित करना चाहते हैं। ये वादा हम में से हरेक के लिए है जो किसी पूर्ण सत्गुरु की मदद व मार्गदर्शन से आंतरिक रूहानी यात्रा पर जाता है।