अंतर में अनंत दीप जलायें

नवम्बर 12, 2023

लाइल, इलिनोई, के साइंस ऑफ़ स्पिरिच्युएलिटी सेंटर में आज संत राजिन्दर सिंह जी महाराज ने दीवाली के महत्त्व पर रविवारीय सत्संग फ़र्माया। प्रकाश का यह पर्व हिंदू धर्मग्रंथों पर आधारित है, और सर्दियों व नववर्ष की शुरूआत का आनंद मनाता है। इस समय हम बीते हुए साल और आने वाले साल पर सोच-विचार करते हैं, तथा रुककर यह सोचते हैं कि हम सही क्षेत्र में प्रयास लगा रहे हैं या नहीं।

महाराज जी ने फ़र्माया कि बाहरी दीवाली पर जलाया जाना वाला प्रकाश अस्थाई होता है, तथा फिर संत दर्शन सिंह जी महाराज का एक शेअर सबके सामने रखा : दीवाली के दीप हैं जलते, पल भर में बुझ जाते हैं; अंतर ऐसा दीप जला दो सदा रहे उजियारा। प्रकाश के इस त्यौहार का गहरा महत्त्व ये है, महाराज जी ने समझाया, कि ये हमें बाहरी रौशनियों से आगे जाने और अंतर की रौशनी के साथ जुड़ने के लिए प्रेरित करता है।

इस रौशनी के साथ जुड़कर हमारे जीवन का अंधकार समाप्त हो जाता है, हम प्रभु के प्रेम में नहा जाते हैं, तथा हमें वो शांति और ख़ुशी मिल जाती है जिसे हम ढूंढ रहे थे। जीवन के अंधकार का अर्थ है वो मुश्किलें जो हम शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक, और आध्यात्मिक स्तरों पर महसूस करते हैं। ये चुनौतियाँ जीवन का एक हिस्सा हैं, महाराज जी ने फ़र्माया। जैसे-जैसे हमारी उम्र बढ़ती है, हमें शारीरिक तकलीफ़ें और चुनौतियाँ सहनी पड़ती हैं। हमारे रिश्ते-नाते भी इंसानी जीवन के अस्थाई स्वभाव से प्रभावित होते हैं, जिससे हमें दुख सहना पड़ता है। हमें मानसिक स्तर पर भी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। ये सब चीज़ें इंसानी जीवन का हिस्सा हैं। लेकिन हमें याद रखना चाहिए कि हमारी आध्यात्मिक सेहत सबसे ज़्यादा ज़रूरी है। ये हमारे अस्तित्व का वो हिस्सा है जो शारीरिक मृत्यु के बाद भी कायम रहेगा।

हमारी आत्मा ख़ुद को, और प्रभु के साथ अपने रिश्ते को, भूल चुकी है। प्रभु चाहते हैं कि हम प्रभु के पास वापस पहुँचें, और उन्होंने हमें वो सभी पदार्थ दिए हैं जो अपने सच्चे घर जाने के लिए हमें चाहियें। ज़रूरत है तो प्रभु को जानने की इच्छा रखने की, संत राजिन्दर सिंह जी ने फ़र्माया। हम प्रभु को कैसे जान सकते हैं? प्रभु को हम ध्यानाभ्यास के द्वारा अपने शरीर व मन को स्थिर करके ही पा सकते हैं। जब हम बाहरी संसार से ध्यान हटाते हैं, तो हम प्रभु के प्रेम व प्रकाश के साथ जुड़ जाते हैं, जिससे हमारी आत्मा को पोषण और ताकत मिलती है। अगर हमें जीवन की चुनौतियों के अंधकार को मिटाना है, और उस स्थाई ख़ुशी को पाना है जिसे हम ढूंढ रहे हैं, तो हमें अंदरूनी आध्यात्मिक यात्रा पर जाना होगा और अपने अंतर में अनंत दीप जलाना होगा।