अपनी एकता को गले लगायें

अप्रैल 8, 2023

आज के अपने वैब प्रसारण में संत राजिन्दर सिंह जी महाराज ने गुरु नानक देव जी महाराज (1469-1539) की शिक्षाओं पर प्रकाश डाला। गुरु नानक देव जी ने एशिया और मध्यपूर्वी देशों की यात्राएँ कर संसार को प्रभु की बनाई सृष्टि की एकता की याद दिलाई, तथा हमें बाहरी भेदभाव से ऊपर उठकर अपनी आंतरिक एकता को अपनाने की शिक्षा दी। उन्होंने हमें सिखाया कि अलग-अलग बाहरी परिस्थितियाँ होने के बावजूद हम सब एक हैं।

इस सच्चाई का अनुभव हम ध्यानाभ्यास के द्वारा कर पाते हैं। प्रभु की ओर जाने वाला मार्ग दुनिया को छोड़ देने का मार्ग नहीं है, बल्कि वो मार्ग है जिसमें हम अपनी सभी सांसारिक ज़िम्मेदारियों को निभाने के साथ-साथ प्रभु-प्राप्ति के लक्ष्य की ओर भी कदम बढ़ाते जायें। यह ज़रूरी है कि हम ईमानदारी के साथ अपनी आजीविका कमायें, तथा प्रभु के पास वापस जाने में एक-दूसरे की मदद करें। गुरु नानक देव जी ने हमें याद दिलाया कि हम प्रभु से दूर नहीं हैं; प्रभु हमारे साथ हैं और हमारे अंदर हैं। प्रभु का अनुभव करने के लिए हमें केवल अपने ध्यान को बाहरी संसार से हटाकर अपने अंतर में एकाग्र करना है।

गुरु नानक देव जी की शिक्षाओं के बारे में बात करते हुए संत राजिन्दर सिंह जी ने आगे फ़र्माया कि बाहरी संसार में सच्ची ख़ुशी नहीं है। हम हर समय किसी न किसी मुसीबत से घिरे रहते हैं, चाहे शारीरिक हो, मानसिक हो, भावनात्मक हो, या आर्थिक हो। जो ख़ुशी के क्षण हमारे जीवन में आते भी हैं, वो क्षणिक होते हैं। सदा.सदा की ख़ुशियाँ पाने के लिए हमें प्रभु के साथ जुड़ना होगा, जोकि समस्त ख़ुशियों और आनंद के स्रोत हैं। उन्होंने समझाया कि हम ध्यानाभ्यास के द्वारा प्रभु के साथ जुड़ सकते हैं।