आत्मा की सफ़ाई के तीन चरण
इस भौतिक संसार के साथ हमारी अंतर्क्रिया और प्रभावों के कारण हमारी आत्मा मैल और गंदगी की पर्तों में घिर जाती है। यदि हमारी आत्मा, परमात्मा से मिलना चाहती है, तो इन पर्तों को साफ़ करना होगा, ताकि हमारी आत्मा अपनी मौलिक सुंदरता से दमक उठे। आज संत राजिन्दर सिंह जी महाराज ने समझाया कि हम उन अशुद्धियों को कैसे साफ़ कर सकते हैं जो हमारी आत्मा को गंदा करती हैं।
आत्मा को साफ़ करने का पहला तरीक़ा है ध्यानाभ्यास। जब हम ध्यान टिकाते हैं, तो हम ख़ुद को प्रभु के प्रेम व प्रकाश के साथ जोड़ देते हैं, जोकि हम सबके भीतर मौजूद रचनात्मक सत्ता है। इस सत्ता, जोकि समस्त शुद्धता और पवित्रता का स्रोत है, के साथ जुड़ने से हमारी आत्मा पर पड़ी पर्तें उतर जाती हैं। जितना अधिक हम इस सत्ता के साथ जुड़ते जाते हैं, उतना ही अधिक हम साफ़ होते जाते हैं।
दूसरे, हमें अधिक प्रेमपर्ण, सच्चा, और विनम्र बनना होगा। जब हम इन नैतिक सद्गुणों का विकास करते हैं, तो हम पाते हैं कि हमारा जीवन बेहतर होता जाता है और हमारे अवगुण अपने आप कम होते जाते हैं। हमें ध्यान देना चाहिए कि हम अपना जीवन कैसे बिता रहे हैं और अपनी ग़लतियों का निरीक्षण करना चाहिए, ताकि हर गुज़रते दिन के साथ हमारे अंदर सुधार आता जाए।
तीसरे, हमें प्रभु की बनाई सृष्टि की एकता को पहचानना चाहिए। जब हम इस एकता को स्वीकार कर लेते हैं, और दूसरों को अपने ही अंग के रूप में देखने लगते हैं, तो हम निस्वार्थ रूप से दूसरों की मदद करने लगते हैं, ताकि उनके दुख-तकलीफ़ कम हो सकें। जब हम ऐसा करते हैं, तो हम अपनी आत्मा की सफ़ाई भी करते हैं।
ये तीन क़दम उठाने से, हम देखते हैं कि हमारा जीवन ख़ुशियों से भरपूर हो जाता है, तथा हमारी आत्मा पर पड़ी गंदगी की वो पर्तें साफ़ होती जाती हैं जो हमें प्रभु की ओर बढ़ने से रोकती हैं।