जीवन के महासागर को पार करना

जून 26, 2022

हमारा सच्चा स्वरूप हमारी आत्मा है। हमारी आत्मा, परमात्मा का अंश है, और इसे प्रभु से बिछुड़े हुए अनेकों युग बीत चुके हैं। यह अपने स्रोत के पास वापस जाने के लिए तड़प रही है। इस मानव चोले में हमें यह अवसर दिया गया है कि हम प्रभु के पास वापस पहुँच सकें। प्रभु के पास वापस जाने की यात्रा को ही आत्मिक यात्रा या आध्यात्मिक यात्रा कहते हैं।

इस यात्रा पर जाने और तरक़्क़ी करने के लिए हमें ध्यान-अभ्यास करना होता है। इस यात्रा में तरक़्क़ी करने के लिए, हमें आत्म-सहायता की पुस्तकें और ध्यान-अभ्यास के प्रदर्शन से अधिक की ज़रूरत पड़ती है। हमें एक आध्यात्मिक सत्गुरु की मदद व मार्गदर्शन की ज़रूरत होती है, जो इस यात्रा की जटिलताओं से परिचित हों, और जो मार्ग में आने वाले आकर्षणों और ख़तरों से हमारी रक्षा कर सकें। हमें अपने आंतरिक ख़ज़ानों का स्वयं अनुभव करने की आवश्यकता है। जब हम ध्यान-अभ्यास करते हैं, तो हमारी आत्मा, प्रभु की ज्योति व प्रेम के साथ जुड़ जाती है, और इसे पोषण व शक्ति मिलती है।

हमें सच्चा प्रयास करना चाहिए, तथा नियमित रूप से व लगन से ध्यान-अभ्यास करना चाहिए, ताकि हम प्रभु की ओर तेज़ी से कदम उठा सकें। करें और जब हमें सही मार्गदर्शन प्राप्त हो। यह ज़िन्दगी बहुत छोटी है, और समय किसी की प्रतीक्षा नहीं करता है। यह हम पर है कि हम ख़ुद को मिले समय से पूरा-पूरा लाभ उठायें, ताकि हमारी आत्मा इस संसार रूपी महासागर से पार जा सके और प्रभु के साथ एकमेक हो सके।