प्रभु के प्रेम के प्रति जागृत हों
इस शाम, संत राजिन्दर सिंह जी महाराज और उनकी पत्नी, माता रीटा जी, तीन दिनों की यात्रा के लिए नीदरलैंड्स के शहर सर्टोगनबॉश में पधारे। यूरोप और विश्व के अन्य देशों से आए जिज्ञासुओं ने मासपूर्ट स्पोर्टस एरीना में महाराज जी का स्वागत किया। अपने पहले सत्संग में महाराज जी ने हमें याद दिलाया कि प्रभु के प्रेम का अनुभव करने के लिए हमें अपने दिल, हाथ, और आत्मा को प्रभु के लिए खोल देना होगा, ताकि हम जीवन के उच्चतम उद्देश्य को पूरा कर सकें।
अपनी नवीनतम पुस्तक ‘अबोड ऑफ़ लाइट’ से एक शेअर चुनकर, जिसे मूल रूप से उर्दू में संत दर्शन सिंह जी महाराज ने 1969 में लिखा था, संत राजिन्दर सिंह जी ने उन देनों के बारे में बताया जो हमें एक संत या पूर्ण सत्गुरु से मिलती हैं। जब संत इस दुनिया में आते हैं, तो उनका मुख्य काम होता है हमें हमारे अंदर मौजूद प्रभु के प्रेम व प्रकाश का अनुभव करने में मदद करना। हम चाहे किसी भी धर्म के अनुयायी हों, हम केवल अपने धर्म के बाहरी पहलू और रस्मो-रिवाज़ की ओर ही ध्यान देते रहते हैं, और उस अंदरूनी या गहरे पहलू को भूल जाते हैं जो इन रस्मो-रिवाज़ के असली मतलब को समझाता है।
संत-महापुरुष धर्म के आंतरिक पहलू की ओर हमारा ध्यान दिलाते हैं, जो हमें प्रभु की ओर ले जाता है। ध्यानाभ्यास के द्वारा हमें प्रभु की ज्योति के साथ जोड़कर, वे हमें प्रभु के प्रेम का अनुभव करा देते हैं। दयाल पुरुष के कई अन्य शेअरों के द्वारा महाराज जी ने समझाया कि संत कैसे हमें प्रभु के प्रेम के साथ जोड़ देते हैं। इस आध्यात्मिक जागृति के साथ ही हम अपने स्रोत के पास वापस जाने के लिए तड़प उठते हैं। एक पूर्ण संत की दया-मेहर और प्रेम से हमारा जीवन परिवर्तित हो जाता है, और हम अपने सच्चे घर वापस जाने की यात्रा पर चल पड़ते हैं।