वॉशिंगटन डी.सी. की यात्रा

मई 19, 2023

18 मई, उद्घाटन – संत राजिन्दर सिंह जी महाराज, अपनी पत्नी माता रीटा जी और और अपने बेटे डॉ. कुँवरजीत सिंह दुग्गल जी के साथ, दो-दिवसीय आध्यात्मिक कार्यक्रम के लिए वॉशिंगटन डी.सी. में पधारे। इस दिन का मुख्य कार्यक्रम था वॉशिंगटन डी.सी. के 2950 ऐरीज़ोना ऐवैन्यू, में साइंस ऑफ़ स्पिरिच्युएलिटी (SOS) सेंटर का उद्घाटन।

2013 में ख़रीदी गई यह इमारत पैलीसैड्स के सुंदर, हरियाली से भरपूर इलाके में है। यह पोटोमैक नदी से दो ब्लॉक्स दूर है, तथा व्हाइट हाउस से लगभग पाँच मील दूर है। सेंटर के बीचोबीच एक सैंक्चुयरी है, जो सत्संग व ध्यान-अभ्यास के लिए इस्तेमाल की जाती है। पिछले दस सालों से वॉशिंगटन डी.सी. के SOS सेंटर में अनेकों आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं, जिन्होंने जिज्ञासुओं में आध्यात्मिक और व्यक्तिगत विकास को प्रोत्साहित किया है।

इसकी उत्तम लोकेशन – प्रकृति की हरियाली से घिरा होना, तथा अनेक प्रतिष्ठित शैक्षिक संस्थानों व प्रसिद्ध स्मारकों के नज़दीक होना – की बात करते हुए संत राजिन्दर सिंह जी ने फ़र्माया कि ऐसे सेंटर का इंसानों की आध्यात्मिक प्रगति में बहुत बड़ा योगदान है। उन्होंने सबको इस सेंटर से पूरा-पूरा लाभ उठाने की, एक-दूसरे के साथ प्यार से काम करने की, और सेंटर में हमेशा सकारात्मक विचार रखने की सलाह दी।

19 मई, स्थाई शांति ख़ुशी के लिए मन का शुद्धिकरण करें संत राजिन्दर सिंह जी ने आर्लिंगटन, वर्जीनिया, के रैनीसाँस आर्लिंगटन कैपिटल व्यू में सत्संग फ़र्माया। दुनिया भर से आए जिज्ञासुओं व अतिथियों से हॉल पूरी तरह से भरा हुआ था। महाराज जी ने ‘स्थाई शांति व ख़ुशी के लिए मन का शुद्धिकरण करें’ विषय पर सत्संग फ़र्माया, और समझाया कि शांति, हलचल की अनुपस्थिति को कहते हैं। लेकिन हलचल और तनाव आज हमारे दैनिक जीवन का हिस्सा हैं।

भौतिक इंद्रियों के स्तर पर जीते हुए, और ख़ुद को केवल शरीर ही मानते हुए, हम अपने शरीर का शुद्धिकरण करने में लगे रहते हैं, उस ख़ुशी को पाने के लिए जिसे हम ढूंढते फिर रहे हैं। लेकिन अपने शरीर का शुद्धिकरण करने के बावजूद हमारा जीवन तनाव और हलचल से भरपूर ही रहता है। अगर हमें स्थाई ख़ुशी पानी है, महाराज जी ने समझाया, तो हमें अपने शरीर का शुद्धिकरण नहीं करना है, बल्कि अपने मन का शुद्धिकरण करना है, जोकि हमारे जीवन में व्याप्त तनाव व हलचल का मुख्य कारण है।

मन का शुद्धिकरण करना संतों-महापुरुषों का काम है। वे ऐसा करते हैं हमें क्रोध, लोभ, मोह, चिंता, और अपेक्षाओं के विष से दूर रहने की शिक्षा देकर। इन ज़हरीले पदार्थों को हमारे अंदर से हटाकर वे हमें प्रभु के साथ जुड़ने में मदद करते हैं। जो कुछ जड़ है, वो समय के साथ-साथ अवश्य नष्ट हो जाता है, महाराज जी ने फ़र्माया। केवल प्रभु ही स्थाई हैं। अगर हम स्थाई ख़ुशी पाना चाहते हैं, तो हमें प्रभु के साथ जुड़ना होगा। हमें प्रभु के साथ अपने रिश्ते का सीधा अनुभव करना होगा, और अपने जीवन में प्रभु की उपस्थिति को महसूस करना होगा। ऐसा हम कर सकते हैं ध्यानाभ्यास की पुरातन विधि के द्वारा।