संतों के प्रेम में शरण लें

मार्च 28, 2024

संत राजिन्दर सिंह जी महाराज ने इस शाम मनामा, बहरीन, के गल्फ़ कन्वेन्शन सेंटर में सार्वजनिक सत्संग फ़र्माया। विशाल जनसमूह को सम्बोधित करते हुए महाराज जी ने उस समय की बात की जिसमें हम जी रहे हैं। हमारा रोज़मर्रा का जीवन बहुत ही व्यस्त हो गया है, और हमारे अनेक काम और ज़िम्मेदारियाँ हमें उस शांति को पाने से रोकते हैं जिसकी हमें तलाश रहती है। उन्होंने फ़र्माया कि हम शांति और प्रेम इसीलिए ढूंढते हैं क्योंकि हमें सदा-सदा रहने वाली ख़ुशियों की खोज होती है।

अपनी शारीरिक इंद्रियों के स्तर पर जीते हुए, हम सोचते हैं कि इस संसार में सिर्फ़ वही है जो हम अपनी इंद्रियों के द्वारा अनुभव करते हैं, और जो कुछ भी हम पा सकते हैं वो इस भौतिक संसार की सीमाओं के अंदर ही पा सकते हैं। इसीलिए, हम इस क्षणभंगुर संसार में स्थाई ख़ुशियाँ ढूंढते रहते हैं। भौतिक संसार में अपनी खोज पूरी कर लेने के बाद हम अपने-अपने धर्म की ओर मुड़ते हैं।

संत राजिन्दर सिंह जी ने फ़र्माया कि सभी धर्मों की पुस्तकों में उन महापुरुषों के अनुभव दिए गए हैं जिनकी शिक्षाओं पर वो धर्म बने हैं। सभी धर्मों और युगों में आए संत-महापुरुष यही बताते हैं कि उन्होंने अंदरूनी मंडलों में स्थाई ख़ुशियाँ पाईं। ये रूहानी मंडल हमारे इस भौतिक मंडल के साथ-साथ अस्तित्व में हैं, और इनके खज़ानों का अनुभव करने के लिए हमें आंतरिक आध्यात्मिक यात्रा पर जाना होगा।

हम इन खज़ानों का अनुभव कैसे कर सकते हैं? हम ऐसा कर सकते हैं एक पूर्ण सत्गुरु की मदद और मार्गदर्शन के द्वारा। जहाँ हमारे सांसारिक रिश्ते-नाते हमें इस भौतिक संसार का ज्ञान प्रदान करते हैं, वहीं एक सत्गुरु हमें आध्यात्मिक मंडलों का ज्ञान प्रदान करते हैं। ध्यानाभ्यास के द्वारा हम आंतरिक रूहानी मंडलों की अनंत सुंदरता, शांति, प्रेम, और ख़ुशी का अनुभव कर सकते हैं, अपने आत्मिक स्वरूप के प्रति जागृत हो सकते हैं, और प्रभु-प्रेम के रंगों में रंग सकते हैं।