अपनी भावनात्मक पीड़ा को ध्यानाभ्यास से दूर करें

जुलाई 23, 2022

हमारी भावनाएँ दूसरों के साथ हमारी बातचीत और अंतर्क्रिया पर निर्भर करती हैं, और जब हमारी आपसी बातचीत तनावपूर्ण हो जाती है, तो हम भावनात्मक पीड़ा का अनुभव करते हैं। जब हम इस पीड़ा के कारणों को समझने की कोशिश करते हैं, तो हम जान जाते हैं कि यह पीड़ा तब उत्पन्न होती है जब हम अपने आप को दूसरों से अलग समझते हैं। अपने आप को अलग समझने के कारण ही हम ख़ुद को दूसरों से बेहतर करना चाहते हैं। ऐसा करने की दौड़ में हम जलन का अनुभव करते हैं, और जब परिस्थितियाँ हमारी अपेक्षाओं पर खरी नहीं उतरती हैं, तो हम दर्द का अनुभव करते हैं। इस पीड़ा से निपटने की कुंजी है, इस सही समझ का विकास करना कि हम कौन हैं।

हमें एक-दूसरे के साथ अपने संबंध को, और प्रभु की बनाई सृष्टि के साथ अपनी एकता को, पहचानना चाहिए। ध्यानाभ्यास के द्वारा हम ख़ुद को आत्मा के रूप में जान सकते हैं, और अपने आपसी संबंध का अनुभव कर सकते हैं। जब हम दूसरों को अपने ही अंग के रूप में देखने लगते हैं, तो हम द्वैत की दुनिया को त्यागकर एकता के जीवन को गले लगा लेते हैं, जिसमें हमारे अंदर से दूसरों के लिए केवल प्रेम ही बाहर निकलता है। जब हम इस अवस्था में पहुँच जाते हैं, तो हम पाते हैं कि हमारी भावनात्मक पीड़ा दूर हो गई है।