प्रभु के प्रेम से ताकत पायें
आज संत राजिन्दर सिंह जी महाराज ने कृपाल बाग़ में सत्संग फ़र्माते हुए प्रभु के प्रेम की परिवर्तनीय शक्ति के बारे में बताया, और समझाया कि इस प्रेम का अनुभव करने से हमें बहुत ताकत मिलती है। इस भौतिक संसार के विभिन्न आकर्षणों के बीच जीते हुए, हम कई अलग-अलग दिशाओं में खिंचते रहते हैं, जो हमारा ध्यान उस चीज़ से हटा देती हैं जो असल में महत्त्वपूर्ण है – हमारे जीवन का उद्देश्य और इस मानव चोले में आने का असली कारण।
संत हमें इस उद्देश्य की याद दिलाने के लिए आते हैं, और बताते हैं कि अपने मानव जन्म से पूरा-पूरा फ़ायदा उठाने के लिए हमें अपने ध्यान को सही दिशा में लगाना होगा। वे हमें ज़िन्दगी की सही समझ देते हैं और हमें इस संसार के अस्थाई होने की याद दिलाते हैं। वे हमें समझाते हैं कि जीवन के अंत में जो चीज़ ज़रूरी होगी, वो हमारी भौतिक दौलत नहीं होगी, बल्कि ये होगी कि हमने प्रभु की नज़दीकी पाई या नहीं। ये नज़दीकी अपनी बुद्धि को तेज़ करने से नहीं मिलेगी, बल्कि प्रेम के मार्ग पर चलने से मिलेगी।
ये प्रेम इतना ताकतवर होता है कि ये हमारे ध्यान को बाहरी संसार से हटाकर आंतरिक मंडलों में ले जाता है, जो प्रेम, शांति, और आनंद से भरपूर हैं। ये अनुभव करने से हमें जीवन के उतार-चढ़ाव का सामना करने में मदद मिलती है, जो वैसे हमें अकेला और डरा हुआ छोड़ देते हैं। ये सीधा अनुभव प्रभु में हमारे विश्वास को मज़बूत बनाता है, और हमें प्रभु की नज़दीकी दिलाता है।
हमें ये मानव चोला प्रभु के पास वापस जाने के लिए ही दिया गया है, महाराज जी ने ज़ोर देते हुए समझाया। जो लोग अपने लक्ष्य तक पहुँचने के लिए समय और प्रयास लगाते हैं, वो उसे अवश्य पा लेंगे। इसीलिए, ये ज़रूरी है कि हम सही दिशा में ध्यान लगायें और सभी ज़रूरी कदम उठायें। हम ऐसा कर सकते हैं, सबसे पहले, अहिंसा, पवित्रता, सच्चाई, नम्रता, और प्रेम से भरा नैतिक जीवन बिताकर। दूसरे, हमें इस मज़बूत नींव को आधार बनाकर नियमित ध्यानाभ्यास करना चाहिए, ताकि हम अंतर में प्रभु की ज्योति का अनुभव कर सकें।