ध्यानाभ्यास के द्वारा शांति का ककून बनायें

जनवरी 14, 2023

हम ऐसी अवस्था में कैसे पहुँच सकते हैं कि बाहरी संसार की हलचल और मुसीबतें हमारी शांति को भंग न कर पायें? संत राजिन्दर सिंह जी महाराज ने समझाया कि दूसरों के साथ हमारे वार्तालाप या आपसी संपर्क तब हमारे अंदर हलचल पैदा कर देते हैं जब हम उनके साथ सहमत नहीं होते हैं या उनके साथ बौद्धिक तर्क-वितर्क में लग जाते हैं। ऐसी स्थिति में शांति पाने के लिए हमें ध्यानाभ्यास के दौरान मिलने वाली शांति का अनुभव करना होगा।

मुख्य बात है ध्यानाभ्यास में इतने अधिक आनंद का अनुभव करना कि हम अपने आसपास की हलचल से अप्रभावित रहें। जिस तरह घर में एयर-कंडीशनर लगा होने से हम ठंडे और आरामदायक माहौल में रहते हैं चाहे बाहर कितनी ही गर्मी क्यों न हो, उसी तरह ध्यानाभ्यास हमें शांत बनाए रखता है चाहे बाहरी संसार में कितनी ही हलचल क्यों न हो।

हमें ध्यानाभ्यास द्वारा बनाए गए आध्यात्मिक ककून (कोया) में रहना सीखना होगा, संत राजिन्दर सिंह जी ने फ़र्माया, ताकि हम ध्यानाभ्यास करने के बाद भी ख़ुशी व आनंद की अवस्था में बने रहें। जितना अधिक हम अभ्यास करते हैं, उतना ही अधिक हम गहन चेतनता की अवस्था में पहुँचते जाते हैं, जो हमें उन चीज़ों से सुरक्षा प्रदान करती है जो हमारी शांति को भंग करती हैं।