2024 में ज़्यादा ध्यानाभ्यास करने के लिए कुछ ज़रूरी बातें

जनवरी 21, 2024

इस दोपहर, संत राजिन्दर सिंह जी महाराज ने संगत के समक्ष साल 2024 का पहला सत्संग फ़र्माया। एस.ओ.एस. इंटरनेशनल मेडिटेशन सेंटर का मुख्य हॉल श्रद्धालुओं से पूरी तरह से भरा हुआ था, जो इस बेहद ठंडे मौसम में भी महाराज जी की दिव्य शारीरिक उपस्थिति से लाभ उठाने के लिए यहाँ आए थे। अपने सत्संग में महाराज जी ने सबको इस साल के स्लोगन की याद दिलाई – ‘मेडिटेट मोर इन 2024’ (ध्यानाभ्यास ज़्यादा 2024 में), तथा उन ज़रूरी चीज़ों के बारे में बताया जिनसे हम इस साल ध्यानाभ्यास में ज़्यादा से ज़्यादा समय दे सकते हैं।

फ़ायदों को समझें: ध्यानाभ्यास करने में सबसे बड़ी रुकावट है हमारा मन, संत राजिन्दर सिंह जी ने फ़र्माया। ध्यानाभ्यास के दौरान अपने विचारों पर काबू पाना मुश्किल होता है। अगर हम मन को ध्यानाभ्यास के फ़ायदों के बारे में समझा सकें, तो वो आध्यात्मिक लक्ष्य को पाने में हमारा मददगार बन जाएगा। ध्यानाभ्यास के बहुत सारे फ़ायदे हैं। मानसिक स्पष्टता, बढ़ी हुई एकाग्रता, और कार्यकुशलता में बढ़ोतरी के कारण, ध्यानाभ्यास हमें जीवन के सभी पहलुओं में तरक्की करने में मदद कर सकता है। सबसे बढ़कर, ध्यानाभ्यास हमें आध्यात्मिक लाभ प्रदान करता है तथा हमें जीवन के सबसे महत्त्वपूर्ण लक्ष्य को पाने में मदद करता है, जो है  प्रभु के साथ एकमेक होना।

सही तरीके पर ज़ोर दें: दूसरा, बेहतर नतीजे पाने के लिए हमें ये भी सुनिश्चित करना होगा कि हम सही तरीके से ध्यान टिका रहे हैं। जब हमारी तकनीक सही होगी, जब हमारा शरीर और मन पूरी तरह से स्थिर होंगे, तो हम अपने मन की ध्यान भटकाने की या नींद लाने की चालों के बावजूद, वर्तमान पल में एकाग्र रह पायेंगे। जितना अधिक समय हम सही तरीके से ध्यानाभ्यास करने में लगायेंगे, उतना ही हमें बेहतर नतीजे मिलेंगे, महाराज जी ने समझाया।

अभ्यास, अभ्यास, अभ्यास: ध्यान टिकाने की सही तकनीक जान लेने के बाद, हमें प्रतिदिन ध्यान का अभ्यास करना चाहिए, ताकि हम उसमें माहिर हो जायें, महाराज जी ने फ़र्माया।

प्रेरणा और लगन: जीवन में हम उसी काम में सफल होते हैं जो करने के लिए हम प्रेरित महसूस करते हैं, संत राजिन्दर सिंह जी ने समझाया। आध्यात्मिक क्षेत्र में भी ये बात सच है। अगर हम प्रेरित रहेंगे, और ध्यानाभ्यास करने के लिए हमारे अंदर एक लगन और उत्साह होगा, तो हम ज़रूर उसके लिए नियमित समय दे पायेंगे। जब हम अपना ध्यान इसके सबसे बड़े लाभ की ओर रखते हैं, जो है अपने अंदर की दिव्य सत्ता का अनुभव करना, तो हमारा ध्यान भटकता नहीं है और हम अपने लक्ष्य पर एकाग्र रहते हैं। ये अवस्था नियमित अभ्यास और आंतरिक अनुभव से ही आती है।

विश्वास रखें: ध्यानाभ्यास में सफल होने के लिए हमें अपने लिए प्रभु की योजना में पूरा यक़ीन रखना चाहिए। अगर हम हर दिन पूरे विश्वास के साथ ध्यान टिकाने के लिए बैठेंगे, तो प्रभु हमें वो ज़रूर देंगे जो हमारे लिए सही होगा, और धीरे-धीरे हमें अपने सच्चे घर वापस ले जायेंगे।