प्रभु के प्रेम व प्रकाश से दमकना

जुलाई 19, 2022

इस साल आरंभिक जुलाई में नासा ने जेम्स वैब टैलिस्कोप से लिए गए चित्र ज़ारी किए, जिससे वैज्ञानिकों को अंतरिक्ष के निर्माण की और प्राचीनतम आकाशगंगाओं की पहली झलक मिली, उस प्रकाश के द्वारा जिसे धरती तक पहुँचने में खरबों प्रकाशवर्ष लगे हैं। विज्ञान के इस अति महत्त्वपूर्ण मील के पत्थर का उल्लेख करते हुए संत राजिन्दर सिंह जी महाराज ने आज एक अन्य तरह के प्रकाश की बात की, जिसका अध्ययन संत-महापुरुष अनंत काल से करते चले आए हैं – और वो है आंतरिक प्रकाश। इस अंदरूनी प्रकाश का अनुभव करने के लिए किसी बाहरी तकनीक या उपकरण की ज़रूरत नहीं पड़ती है, महाराज जी ने फ़र्माया, क्योंकि यह हमारे भीतर ही मौजूद है। इस आंतरिक प्रकाश का अनुभव करने से हम जीवन के गहनतम रहस्यों को सुलझा पाते हैं। तो हम इस अंदरूनी प्रकाश का अनुभव कैसे कर सकते हैं?

हम में से हरेक को जन्म से ही आध्यात्मिक आँख मिली है, जो हमारी दोनों भौंहों के पीछे व बीच में स्थित है तथा आंतरिक आध्यात्मिक मंडलों में जाने का प्रवेशद्वार है। ध्यानाभ्यास की प्रक्रिया द्वारा जब हम अपने ध्यान को बाहरी संसार के आकर्षणों से हटाकर इस प्रवेशद्वार पर एकाग्र करते हैं, तो हम आंतरिक प्रकाश के साथ जुड़ जाते हैं। जब ऐसा होता है तो हम अपने अस्तित्व की सच्चाई के प्रति जागृत हो उठते हैं।

प्रभु समस्त प्रेम, ख़ुशी, और आनंद का स्रोत हैं, तथा जब हम प्रभु के प्रेम व प्रकाश के साथ जुड़ जाते हैं, तो हम इस दिव्य ख़ुशी और आनंद में नहा जाते हैं। जिस तरह एक फ़्लोरोसेंट (प्रतिदीप्त) वस्तु प्रकाश के संपर्क में आने के बहुत देर बाद तक भी चमकती रहती है, उसी तरह हम भी ध्यानाभ्यास के बहुत देर बाद तक दिव्य प्रेम व प्रकाश से दमकते रहते हैं। प्रभु के प्रकाश के संपर्क में आने से हम परिवर्तित हो जाते हैं और दिव्य प्रेम के दूत बन जाते हैं, तथा उसे अपने आसपास के सभी लोगों में फैलाते हैं। साथ ही, हम अपने सच्चे घर की ओर तेज़ी से तरक़्क़ी करते चले जाते हैं। इस यात्रा पर सफलता प्राप्त करने के लिए हमें ध्यान टिकाने की अपनी तकनीक को धैर्य के साथ सटीक करना होगा, और इसके अभ्यास में पूरी तरह से नियमित रहना होगा। हमारा यह भौतिक जीवन तेज़ी से बीतता चला जा रहा है। अब यह हम पर है कि हम इस मानव जीवन से पूरा-पूरा लाभ उठायें और अपने जीवन के उद्देश्य को पूरा कर लें। यह मानव चोला हमारा मौक़ा है आंतरिक प्रकाश में नहा उठने का, ताकि हम प्रभु के प्रेम से दमक उठें।