मोह से रहित जीवन जियें

जून 9, 2024

आज लाइल, इलिनोई के एस.ओ.एस. इंटरनेशनल मेडिटेशन सेंटर में संत राजिन्दर सिंह जी महाराज ने अपने सत्संग में हमें बताया कि हमें कैसा जीवन जीना चाहिए ताकि हम सदा-सदा का आनंद पा सकें और मानव चोले के सच्चे उद्देश्य को पूरा कर सकें। अपनी भौतिक इंद्रियों के स्तर पर जीते हुए हमें लगता है जो कुछ भी हम इन इंद्रियों के द्वारा अनुभव कर रहे हैं, वही सच है, महाराज जी ने फ़र्माया। हम उन आकर्षणों की ओर खिंचे चले जाते हैं जो इस संसार रूपी रंगमंच को सजा रहे हैं, तथा शारीरिक, भावनात्मक, और बौद्धिक वस्तुओं और उपलब्धियों में ही ख़ुशियाँ ढूंढते रहते हैं। लेकिन जीवन में कभी न कभी हम इस भौतिक संसार के अस्थाई स्वरूप के प्रति जागृत हो उठते हैं।

अगर हमें वैसा जीवन जीना है जैसा कि असल में इंसान को जीना चाहिए, तो हमें संतों-महापुरुषों द्वारा दिखाए गए ब्लूप्रिन्ट को अपने जीवन में अपनाना होगा। आध्यात्मिक मार्ग हमें सिखाता है कि हम इस मानव चोले के रूप में मिले दुर्लभ अवसर से पूरा-पूरा लाभ उठायें, ताकि हमारी आत्मा, प्रभु के पास वापस पहुँच सके। लेकिन प्रभु की ओर जाने वाला मार्ग हमें ये नहीं सिखाता कि हम जीवन को नकार दें। हम इस बाहरी संसार की सुंदरता, आकर्षणों, और संपदा का आनंद ज़रूर उठा सकते हैं, लेकिन हमें इन चीज़ों के साथ जुड़ नहीं जाना चाहिए। इस संसार की कोई भी चीज़ हमें स्थाई ख़ुशी नहीं दे सकती, क्योंकि ये सब अस्थाई है।

जिस हमेशा रहने वाली ख़ुशी को हम ढूंढ रहे हैं, उसे पाने के लिए हमें प्रभु के साथ जुड़ना होगा। ऐसा करने के लिए, हमें ध्यानाभ्यास के द्वारा अपने ध्यान को बाहरी संसार से हटाकर आंतरिक संसार में ले जाना होगा। जब हम ऐसा करेंगे, तो हमारी आत्मा प्रभु की ज्योति के साथ जुड़ जायेगी, और अंदरूनी यात्रा पर जाकर आख़िरकार प्रभु में लीन हो जाएगी। इस तरह हमारे जीवन का सर्वोच्च लक्ष्य पूरा हो जाएगा।