ईनाम पर ध्यान केंद्रित रखें
आज ईस्टर संडे के अपने सत्संग में संत राजिन्दर सिंह जी महाराज ने उस सर्वोच्च ईनाम के बारे में बताया जिसे हम सबको पाने की कोशिश करनी चाहिए – अपनी आत्मा का मिलाप परमात्मा में करवाना। जिस तरह बच्चे पूरी लगन और जोश के साथ ईस्टर एैग्स को ढूंढते हैं और अपने मार्ग में आने वाली सभी बाधाओं को पार कर लेते हैं, उसी तरह हमें भी अपनी आध्यात्मिक यात्रा में अपना ध्यान ईनाम की ओर लगाए रखना चाहिए।
हमारी आत्मा को अपने स्रोत, परमात्मा, से बिछुड़े हुए अनगिनत युग बीत गए हैं। यह जीवन हमें इसीलिए दिया गया है ताकि हम अपने सच्चे आत्मिक स्वरूप को जान सकें और प्रभु के पास वापस पहुँच सकें। इसके लिए, सबसे पहले हमें अपने लक्ष्य को जानना चाहिए। उसके बाद हमें उस लक्ष्य तक पहुँचने के प्रयासों में नियमित और एकाग्र बने रहना चाहिए, तथा किसी भी बाधा को अपने मार्ग में आने नहीं देना चाहिए। हमें रोज़ाना ध्यानाभ्यास करने की आदत बनानी चाहिए, और ध्यानाभ्यास की तकनीक में पारंगत होना चाहिए, ताकि हम अपने अंतर में प्रतीक्षा कर रहे प्रभु के प्रेम व प्रकाश के साथ जुड़ सकें।