संत राजिन्दर सिंह जी महाराज का मानव केंद्र में सत्संग
27 सितम्बर को संत राजिन्दर सिंह जी महाराज और उनकी पत्नी, माता रीटा जी, भारत के राज्य उत्तराखंड की राजधानी, देहरादून, पधारे। देहरादून, हिमालय की दून घाटी में स्थित है, ये भारत की राजधानी, नई दिल्ली, से 236 किमी. उत्तर में स्थित है। महाराज जी का कार्यक्रम मानव केंद्र में आयोजित किया गया था, जिसका निर्माण संत कृपाल सिंह जी महाराज (1894-1974) के मार्गदर्शन में किया गया था। मानव केंद्र का निर्माण प्रभु की बनाई सृष्टि की सेवा के लिए किया गया था, जिसमें पशु-पक्षी भी शामिल हैं, और इसका निर्माण 1970 में किया गया था। मानव केंद्र में सबसे सुंदर है मानसरोवर, जो एक बेहद सुंदर और विशाल अंडाकार तालाब है।
एक अंतर्राष्ट्रीय संगत उनके आगमन की प्रतीक्षा कर रही थी। अपने सत्संग में संत राजिन्दर सिंह जी ने मानव केंद्र बनाने में संत कृपाल सिंह जी महाराज के अथक प्रयासों को याद किया। फिर, वैज्ञानिकों के कार्य की तुलना संतों के कार्य से करते हुए, महाराज जी ने समझाया कि जिस तरह वैज्ञानिक भौतिक पदार्थ की रिसर्च कर प्रकृति के रहस्यों को जानने की कोशिश करते हैं, उसी तरह संत चेतनता के क्षेत्र में रिसर्च कर जीवन के गहन रहस्यों को जानते हैं। उनकी तलाश उन्हें बाहरी संसार के बजाय अंतर में ले गई। उन्होंने जान लिया कि प्रभु की सत्ता हर वक़्त हमारे भीतर मौजूद है। इस सत्ता के साथ हम तब जुड़ सकते हैं जब हम अपने ध्यान को बाहरी संसार के आकर्षणों से हटा लें और ध्यानाभ्यास के द्वारा अपने अंतर में एकाग्र करें।
रोज़ाना अभ्यास करने से, हम प्रभु के और नज़दीक आते जाते हैं। हम हर चिंता से मुक्त हो जाते हैं, और हमारा जीवन और अधिक सुंदर होता जाता है क्योंकि हम अपने जीवन में प्रभु की उपस्थिति को लगातार महसूस करने लगते हैं। इस सच्ची तड़प से प्रभु के पास जाने की हमारी गति तेज़ होती चली जाती है। धीरे-धीरे हमारी आत्मा, जो मन, माया, और भ्रम की पर्तों से घिरी है, आज़ाद होती चली जाती है, और उसमें प्रभु के पास वापस जाने की यात्रा पर आगे बढ़ते रहने की ताकत आ जाती है। इस यात्रा के अंत में हमारी आत्मा रूपी छोटी ज्योति, परमात्मा रूपी बड़ी ज्योति में जाकर लीन हो जाती है। बूँद दिव्य महासागर में समा जाती है।