संत दर्शन सिंह जी महाराज (1921-1989) की पावन स्मृति में
आज से 34 वर्ष पूर्व, संत दर्शन सिंह जी महाराज ने यह भौतिक संसार त्याग दिया था। आज शाम हज़ारों श्रद्धालु दयाल पुरुष की पावन स्मृति में कृपाल बाग़ में एकत्रित हुए। दयाल पुरुष एक विश्व-प्रसिद्ध शायर-संत थे, जिन्होंने दुनिया भर के लाखों लोगों को अध्यात्म का संदेश दिया।
संत दर्शन सिंह जी, प्रेम का जीता-जागता उदाहरण थे। आशा व सकारात्मकता का संदेश फैलाते हुए, उन्होंने अपने जीवन के द्वारा दर्शा दिया कि अध्यात्म का अर्थ जीवन को नकारना नहीं है, बल्कि एक संतुलित जीवन जीना है, जिसमें हम अपने सांसारिक उत्तरदायित्वों का निर्वाह करने के साथ-साथ अपने जीवन के उच्चतम उद्देश्य को भी पूरा करें। हरेक वो इंसान जिसे दयाल पुरुष से मिलने का सौभाग्य प्राप्त हुआ था, उनके असीम प्रेम से प्रभावित हुआ था। संत राजिन्दर सिंह जी महाराज अनेक अवसरों पर दयाल पुरुष को “मानवता के आँसू पोंछने वाला दामन” कह चुके हैं।
संत दर्शन सिंह जी की पावन याद में, दिल्ली के अलग-अलग स्थानों पर सौ से भी अधिक, तथा भारत के अन्य शहरों में और भी अधिक, छबीलें लगाई गईं। सैकड़ों सेवादारों ने मार्ग से गुज़रने वाले लोगों को मुफ़्त, ठंडा, मीठा, गुलाब-शरबत बाँटा।
कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए संत राजिन्दर सिंह जी महाराज की पत्नी, माता रीटा जी, ने धर्मग्रंथों से एक शब्द का गायन प्रस्तुत किया। दयाल पुरुष को पुष्पांजलि अर्पित करते हुए, संत राजिन्दर सिंह जी ने फ़र्माया कि संत दर्शन सिंह जी महाराज के अंदर जो दिव्य प्रेम की सौगात थी, वो उन्होंने कई हज़ारों लोगों के साथ बाँटी जो अलग-अलग पृष्ठभूमियों से उनके पास आते थे। उन्होंने दुनिया भर के लोगों को प्रभु-प्राप्ति का मार्ग दिखाने के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया था, तथा उनकी रचनाएँ अध्यात्म का ख़ज़ाना हैं, महाराज जी ने फ़र्माया।