सब कुछ हमारे भीतर है

सितम्बर 2, 2023

संत राजिन्दर सिंह जी महाराज की नीदरलैंड्स यात्रा के दूसरे दिन एक विशाल अंतर्राष्ट्रीय संगत मासपूर्ट डैन बॉश में एकत्रित हुई। अपने सत्संग में महाराज जी ने प्रेम के उस बाग़ीचे के बारे में बताया जो हम सब अपने अंतर में लिए घूमते हैं। महाराज जी ने फ़र्माया कि सभी विकसित देशों की गगनचुम्बी इमारतों के बीच हम हरियाली के कुछ क्षेत्र पाते हैं, जो हमें जीवन के तनावों और दबावों से राहत देते हैं। लेकिन हमें ये नहीं पता कि हम अपने अंदर भी ऐसा ही एक बाग़ीचा लिए घूम रहे हैं।

प्रभु, जो स्थाई ख़ुशियों का दिव्य स्रोत हैं, इस बाग़ीचे में निवास करते हैं। हम शांति की इस शरणस्थली से अनजान रहते हैं क्योंकि हमारा ध्यान हर वक़्त इस बाहरी संसार में ही लगा रहता है। संत-महापुरुष इस संसार में आते हैं ताकि हमें प्रेम के आंतरिक बाग़ीचे के बारे में बता सकें। वे ऐसा करते हैं हमें ध्यानाभ्यास की तकनीक सिखाकर।

ध्यानाभ्यास के द्वारा अपने ध्यान को बाहरी संसार से हटाकर, और अंदरूनी आँख पर केंद्रित कर, जोकि अंदरूनी बाग़ीचे में जाने का प्रवेशद्वार है, हम उस यात्रा पर जा सकते हैं जो हमें प्रभु के प्रेम और प्रकाश का अनुभव करा देती है। प्रभु के प्रेम के साथ जुड़ जाने से हमारी आत्मा पर पड़ी मन, माया, और भ्रम की पर्तें उतर जाती हैं। जितना ज़्यादा हम ध्यानाभ्यास करते हैं, उतना ही अधिक हमारी आत्मा पर पड़ी ये पर्तें उतरती जाती हैं, और हमारी आत्मा अपनी मौलिक जगमगाती अवस्था में वापस पहुँच जाती है। संत राजिन्दर सिंह जी ने फ़र्माया कि जैसे सूरज की किरणें बादलों वाले दिन भी चमकती रहती हैं, उसी तरह प्रभु का प्रेम भी हमेशा हम पर चमकता रहता है, चाहे हम उसे देख पायें या नहीं। इस परिवर्तनकारी प्रेम को हम ध्यानाभ्यास के द्वारा अनुभव कर पाते हैं।