एक अच्छे जीवन का ब्लूप्रिन्ट

अप्रैल 3, 2022

आज संत राजिन्दर सिंह जी महाराज ने ब्लूप्रिन्ट दिया कि हम प्रभु के पास वापस कैसे पहुँच सकते हैं। यह मानव चोला हमें इसीलिए दिया गया है ताकि हम स्वयं को आत्मा के रूप में जान सकें और प्रभु को पा सकें। अपने सच्चे घर वापस जाने के लिए हमें अपने उद्देश्य को प्राथमिकता देनी होगी और हर दिन इसे पाने की ओर कदम उठाने होंगे।

ध्यानाभ्यास आवश्यक है, महाराज जी ने फ़र्माया। ध्यानाभ्यास में हम अपने ध्यान को बाहरी संसार से हटाकर आंतरिक रूहानी मंडलों में एकाग्र करते हैं, जो सुंदरता और आनंद से भरपूर हैं। जब हम ऐसा करते हैं, तो हम प्रभु के प्रेम और प्रकाश का अनुभव करने लगते हैं, जो हमें भौतिकता से दिव्यता की ओर ले जाता है।

हमें रोज़ाना ध्यानाभ्यास करने की आदत डालनी चाहिए और दिन-ब-दिन अंतर में तरक्की करते जाना चाहिए। हमें सद्गुणों से भरपूर जीवन भी जीना चाहिए, जोकि अध्यात्म की पहली सीढ़ी है। जब हमारा जीवन प्रेमपूर्ण, करुणापूर्ण, अहिंसक, और सच्चा बन जाता है, तो हम ध्यानाभ्यास में बेहतर तरीके से एकाग्र हो पाते हैं। जब हम ध्यानाभ्यास में प्रभु के प्रकाश का अनुभव कर लेते हैं, तो हम प्रभु की बनाई समस्त सृष्टि की एकता के प्रति जागृत हो उठते हैं, और इससे हम दूसरों की मदद करने के लिए प्रेरित होते हैं। हम सेवा का जीवन जीने लगते हैं, ताकि हम अपने साथी इंसानों की सहायता कर सकें। रोज़ाना ध्यानाभ्यास करने से और सद्गुणों से भरपूर जीवन जीने से हम धीरे-धीरे उस लक्ष्य को पाने की ओर तरक्की करते जाते हैं जिसके लिए प्रभु ने हमें इस संसार में भेजा है।