देने की ख़ुशी का अनुभव करें

नवम्बर 25, 2022

2022 थैंक्सगिविंग कार्यक्रम के दूसरे दिन संत राजिन्दर सिंह जी महाराज ने निष्काम सेवा के महत्त्व के बारे में, और अपने जीवन में उदारता व निस्वार्थता का भाव विकसित करने की आवश्यकता के बारे में, बात की। देने का अर्थ है कि हम प्रभु द्वारा ख़ुद को मिली देनों को दूसरों के साथ बाँटें, ताकि दूसरों की मदद हो सके और उनके जीवन में ख़शी आ सके। देने से ही हम पाते हैं, महाराज जी ने समझाया। भौतिक संसार के सीमित सिद्धांतों के नज़रिये से देखा जाए तो यह एक-दूसरे से बिल्कुल विपरीत है, लेकिन आध्यात्मिक सिद्धांतों के नज़रिये से देखा जाए तो जब हम निस्वार्थ रूप से अपनी देनें दूसरों के साथ बाँटते हैं, तो हम प्रभु-प्रेम के खज़ाने पा लेते हैं, और उसके साथ मिलने वाली अकल्पनीय देनें भी पा लेते हैं। संत-महापुरुष इस निस्वार्थता का जीता-जागता उदाहरण होते हैं। उनका जीवन त्याग और निष्काम सेवा की निरंतर कहानी होता है। वो प्रभु की, और प्रभु की बनाई सृष्टि की, अपने पूरे प्रेम, दिल, आत्मा, व साज़ो-सामान से सेवा करते हैं। अगर हम उनके दिखाए उदाहरण पर चल सकें, तो हम सब मिलकर इस दुनिया को एक बेहतर स्थान बना लेंगे।

जब हम अपने जीवन की ओर ग़ौर से देखते हैं, तो हम अपने आसपास मौजूद देनों में प्रभु के असीम वरदान को देख पाते हैं। अब यह हम पर निर्भर है कि हम न केवल ख़ुद को मिली देनों के लिए शुक्रगुज़ार हों, बल्कि उन देनों को दूसरे ज़रूरतमंद लोगों के साथ भी बाँटें, ताकि हम उनके जीवन में भी ख़ुशियाँ और रोशनी ला सकें। जब हम दूसरों को ख़ुशी देते हैं, तो वो अनेपक्षित तरीकों से पलटकर हमारे पास वापस आती है। वो हमारे दिलों को उदार बना देती है, ताकि हम न केवल दूसरों से प्रेम कर सकें बल्कि प्रभु का प्रेम ग्रहण भी कर सकें। इसीलिए, ध्यानाभ्यास के साथ-साथ निष्काम सेवा को भी वो मज़बूत आधार माना जाता है जिसके द्वारा हम प्रभु-प्राप्ति के मार्ग पर तरक्की कर सकते हैं।