हाँ, स्थाई शांति और ख़ुशियाँ पाई जा सकती हैं
हम सब अपने जीवन में शांति चाहते हैं, लेकिन हमें पता नहीं है कि हम उसे कैसे या कहाँ ढूढें। हम बाहरी संसार की चीज़ों और गतिविधियों में ही ख़ुशियाँ तलाशते रहते हैं। हम जीवन की ज़रूरतें पाने के लिए पैसे कमाते हैं। हम अपने शरीर को स्वस्थ रखने के लिए व्यायाम करते हैं और सही खाना खाते हैं, तथाअपने संबंधों में प्यार और शांति बनाए रखने के लिए बहुत प्रयास करते हैं। लेकिन हमारी आर्थिक व्यवस्था में थोड़ी सी गिरावट आते ही, हमारे शरीर में हल्का सा दर्द होते ही, या हमारे रिश्तों में थोड़ा सा भी असंतुलन आते ही, हम इतनी अधिक हलचल से घिर जाते हैं कि हमारे लिए इन मुश्किलों का सामना करना कठिन हो जाता है। हम ख़ुद को बाहरी गतिविधियों में व्यस्त रखते हैं, ताकि कुछ क्षणिक ख़ुशियाँ पा सकें, लेकिन जब चीज़ें हमारी अपेक्षा के विपरीत होती हैं तो हम निराशा से भर उठते हैं। अपनी ओर से सभी प्रयास करने के बावजूद, स्थाई शांति व ख़ुशी हमसे दूर ही रहती है। तो क्या इस संसार में स्थाई ख़ुशियाँ पाना संभव है? अपने रविवारीय सत्संग में संत राजिन्दर सिंह जी महाराज ने इसी विषय पर प्रकाश डाला।
इस संसार में सबकुछ लगातार बदल रहा है, और इसीलिए अस्थाई है। ख़ुद को अस्थाई चीज़ों के साथ जोड़ने से हमें स्थाई ख़ुशियाँ नहीं मिल सकती हैं। जब हमारी मृत्यु होती है, तो जो दौलत, जायदाद, और संपदा कमाने के लिए हम इतनी कड़ी मेहनत करते हैं, वो पीछे ही रह जाती है और हमारे साथ नहीं जाती है। सच्ची ख़ुशी, शांति, और आनंद हमारे भीतर ही हैं, क्योंकि प्रभु, जोकि परमानंद का स्रोत हैं, हमारे भीतर ही हैं।
जीवन का यह सुनहरा अवसर हमें इसीलिए दिया गया है ताकि हम प्रभु की करीबी पा सकें और प्रभु के प्रेम का अनुभव कर सकें। प्रभु का ये प्रेम ही है जो हमें स्थाई शांति, ख़ुशी, व आनंद दे सकता है, संत राजिन्दर सिंह जी ने फ़र्माया। प्रभु-प्रेम का अनुभव करने के लिए हमें अंतर्मुख होना होगा, और ध्यानाभ्यास के द्वारा प्रभु के साथ जुड़ना होगा। जब हम ऐसा करते हैं, तो हम अपने जीवन में एक परिवर्तन का अनुभव करते हैं, और उन स्थाई ख़ुशियों को पा लेते हैं जिनकी हमें तलाश है।