प्रभु के साथ जुड़ें

जुलाई 14, 2024

जीवन में बदलाव स्थाई होता है। समय के साथ-साथ, इस भौतिक संसार में कुछ भी बदले बिना नहीं रहता है। आज लाइल, इलिनोई के एस.ओ.एस. इंटरनेशनल मेडिटेशन सेंटर में अपने सत्संग में, संत राजिन्दर सिंह जी महाराज ने जीवन की इस सच्चाई पर, और जीवन में स्थायित्व ढूंढने की हमारी तलाश पर, प्रकाश डाला। उन्होंने फ़र्माया कि जब हम इस लगातार बदलती हुई दुनिया में सदा-सदा रहने वाला प्यार और ख़ुशी ढूंढते हैं, तो हमें निराशा ही मिलती है।

ऐसा इसलिए क्योंकि हम अपनी शारीरिक इंद्रियों से जो कुछ भी अनुभव करते हैं, वो कुछ भी हमेशा रहने वाला नहीं होता है। स्थायित्व के लिए हमारी तलाश हमें आख़िरकार हमारे धर्मों तक ले जाती है, जो हमें यही बताते हैं कि केवल प्रभु ही स्थाई हैं।

प्रभु शुरुआत में थे, प्रभु आज हैं, और प्रभु हमेशा रहेंगे। अगर हमें अपने जीवन में ख़ुशी, शांति, और स्थिरता चाहिए, तो हमें ख़ुद को प्रभु से जोड़ना होगा। इसके लिए हमें प्रभु का अनुभव करना होगा, और ये अनुभव हमें तब होगा जब हम ध्यानाभ्यास के द्वारा अपने ध्यान को इस क्षणिक बाहरी संसार से हटाकर अंतर के रूहानी मंडलों में एकाग्र करेंगे।

दयाल पुरुष संत दर्शन सिंह जी महाराज के एक ख़ूबसूरत शेअर की व्याख्या करते हुए महाराज जी ने प्रभु के प्रेम के स्थायित्व के बारे में समझाया। जब हम इस स्थाई प्रेम के साथ जुड़ जाते हैं, तो हम अपने आसपास की दुनिया के बदलाव और उतार-चढ़ाव से बेग़ाने हो जाते हैं। इस प्रेम में रंग कर, हम स्थाई आनंद और ख़ुशी की अवस्था में पहुँच जाते हैं, और इसे अपने आसपास के लोगों में भी फैलाते हैं।