अपने लक्ष्य पर एकाग्र रहें

फ़रवरी 19, 2023

आज संत राजिन्दर सिंह जी महाराज ने प्रभु का अनुभव करने के अपने आध्यात्मिक लक्ष्य तक पहुँचने के महत्त्व के बारे में बताया। हमें इस लक्ष्य की ओर से ध्यान नहीं हटाना चाहिए, उन्होंने फ़र्माया। संत दर्शन सिंह जी महाराज की शायरी से कुछ शेअर लेते हुए महाराज जी ने समझाया कि हमारी आत्मा बहुत लंबे समय से प्रभु से बिछुड़ी हुई है और प्रभु में दोबारा लीन होने के लिए तड़प रही है।

हमारा असली स्वरूप क्या है? क्या हम एक शरीर हैं जो एक आत्मिक अनुभव कर रहा है, या हम एक आत्मा हैं जो एक शारीरिक अनुभव से गुज़र रही है? इसी में प्रभु को पाने का रहस्य मौजूद है।

हम सब आत्मा हैं, संत राजिन्दर सिंह जी ने समझाया। जब हमें यह मानव चोला मिलता है, तो ये प्रभु के प्रेम का अनुभव करने का मौका है। इस वक़्त हम अपनी इंद्रियों के स्तर पर ही जी रहे हैं, और केवल उन्हीं चीज़ों का अनुभव कर रहे हैं जो जड़ पदार्थ से बनी हैं। प्रभु के प्रेम का अनुभव करने के लिए हमें आत्मिक रूप से चेतन अवस्था में पहुँचना होगा। ध्यानाभ्यास वो तरीका है जिसके द्वारा हम प्रभु के साथ जुड़ सकते हैं। प्रभु के प्रेम का अनुभव हमें बाहरी संसार के आकर्षणों से दूर कर देता है। तब हम एकता से भरपूर ज़िन्दगी जीने लगते हैं, उन्होंने फ़र्माया, तथा मानवता के वस्त्र में इस तरह पिरोये जाते हैं जैसे दूध में चीनी घुल जाती है।