आध्यात्मिक यात्रा पर धैर्य व निरंतरता
आधुनिक विश्व में, अपने आसपास के लोगों के साथ हमारा संपर्क तात्कालिक हो गया है, और इसीलिए जब हम ध्यानाभ्यास में प्रभु के साथ संपर्क करने की कोशिश करते हैं, तो वहाँ भी हम यही चाहते हैं कि यह संपर्क तुरंत स्थापित हो जाए। जब ऐसा नहीं होता है, तो हम आसानी से हार मान लेते हैं। प्रभु के साथ संपर्क करना इस भौतिक संसार में अन्य लोगों के साथ संपर्क करने जैसा नहीं है। प्रभु का अनुभव हमें प्रभु की मर्ज़ी से ही हो सकता है, और हमारा काम है केवल धैर्य के साथ प्रभु की प्रतीक्षा करना। धैर्य और निरंतरता, आध्यात्मिक मार्ग पर बहुत महत्त्व रखते हैं।
ध्यानाभ्यास में अपने मन को आसानी से शांत करने के लिए, हमें एक ऐसा जीवन जीना चाहिए जो शांति और सुकून से भरा हुआ हो, ताकि हमारे जीवन में ऐसी कोई हलचल न हो जिससे हमारे ध्यानाभ्यास में व्यवधान पड़ने लगे। इसके लिए हमें दूसरों के साथ शांतिपूर्ण ढंग से बातचीत और व्यवहार करना चाहिए, तथा अपने जीवन में हलचल को आने नहीं देना चाहिए। चीज़ों को जाने देने से ही हम प्रभु को पा सकते हैं।