मन का शुद्धिकरण

सितम्बर 3, 2023

इस दोपहर, संत राजिन्दर सिंह जी महाराज ने नीदरलैंड्स में मासपूर्ट डैन बॉश में सत्संग फ़र्माया,  जिसमें शांति पाने के लिए मन का शुद्धिकरण करने के बारे में समझाया गया था। विकसित समय में जीने, और आधुनिक टैक्नोलॉजी की सभी सुविधाएँ होने के बावजूद, हमारा जीवन अपने पूर्वजों के जीवन से ज़्यादा ख़ुश या शांत नहीं है, महाराज जी ने फ़र्माया।

हमारे जीवन में तनाव, दबाव, डर, और चिंता लगातार बने रहते हैं, और शांति व ख़ुशी के पल बहुत ही कम होते हैं या थोड़े समय के लिए ही होते हैं। हम रोज़ाना कई कामों को पूरा करने के लिए लगातार अलग-अलग दिशाओं में खिंचते रहते हैं। तनाव आज के आधुनिक जीवन को दूषित कर चुका है, महाराज जी ने फ़र्माया। जब हमारे मन में तनाव होता है, तो वो शरीर में बीमारी के रूप में व्यक्त होता है।

जीवन की अधिकतर समस्याएँ तब शुरू होती हैं जब विचार हमारे मन को दूषित कर देते हैं। चिंता, डर, व्यग्रता, जलन, और निराशा के प्रदूषण हमें घेर लेते हैं और हमें असहायता की अवस्था में ले जाते हैं। वे हमारे सच्चे स्वरूप, हमारी आत्मा, को ढक लेते हैं, और हम ख़ुद का अनुभव नहीं कर पाते जैसे हम असल में हैं – प्रभु का अंश, प्रेम और प्रकाश से भरपूर।

जैसे हम अपने शरीर को डीटॉक्स करते हैं, या उन दूषित पदार्थों को हटाते हैं जो शरीर को बीमार कर रहे हैं, वैसे ही हम अपने मन को भी डीटॉक्स कर सकते हैं। मन को डीटॉक्स करने का पहला कदम है उन दूषित पदार्थों को पहचानना जो हमें तकलीफ़ पहुँचा रहे हैं, और ये जानना कि ये हमारे मन से पैदा होते हैं। फिर, हमें ध्यानाभ्यास का तरीका सीखना होगा, जिसके द्वारा हम अपने ध्यान को बाहरी संसार से हटाकर आंतरिक रूहानी मंडलों में एकाग्र करके अपने मन को स्थिर कर सकते हैं। इससे हमारी आत्मा, प्रभु की आंतरिक ज्योति के साथ जुड़ जाती है। इस दिव्य प्रकाश के संपर्क में आने से हमारा मन डीटॉक्स हो जाता है और उसे दूषित करने वाले सभी पदार्थ हट जाते हैं।