प्रभु की देनों के लिए शुक्राना करें

नवम्बर 23, 2023

इस थैंक्सगिविंग डे पर, दुनिया भर से आए जिज्ञासु शैरेटन लाइल होटल में एकत्रित हुए, जहाँ चार-दिवसीय थैंक्सगिविंग 2023 कार्यक्रम मनाया जा रहा है। वे एकत्रित हुए अपने पुराने दोस्तों के साथ दोबारा मिलने के लिए, नए दोस्त बनाने के लिए, और सबसे बढ़कर, संत राजिन्दर सिंह जी महाराज की दिव्य शारीरिक उपस्थिति से आध्यात्मिक लाभ उठाने के लिए।

महाराज जी ने सबको थैंक्सगिविंग की बधाई देते हुए पहले दिन के कार्यक्रम में सबका स्वागत किया। थैंक्सगिविंग, महाराज जी ने फ़र्माया, अपनी जीवन में मिली ढेर सारी देनों के लिए शुक्राना करने का समय है। हमें सबसे पहले प्रभु का शुक्राना करना चाहिए, जिन्होंने इस सम्पूर्ण सृष्टि की रचना की है। प्रभु का अदृश्य हाथ ही हर पल हमारी संभाल कर रहा है, और इसके लिए हमें उनका कृतज्ञ होना चाहिए। दूसरे, हमें अपने सत्गुरु की असीम दया और मार्गदर्शन के लिए उनका शुक्राना करना चाहिए। इसके बाद, हमें अपने माता-पिता को धन्यवाद देना चाहिए जिन्होंने हमें पाल-पोस कर बड़ा किया। हमें हर उस इंसान का शुक्रिया अदा करना चाहिए जिसने हमारे जीवन में किसी भी तरह की कोई मदद की है।

इसके बाद महाराज जी ने संत दर्शन सिंह जी महाराज के एक ख़ूबसूरत शेअर की व्याख्या की, जिसमें हम पर संतों-महापुरुषों की अपार दया के बारे में बताया गया था। दर्द और तकलीफ़ हर इंसान की ज़िन्दगी का हिस्सा होते हैं, और हम में से हर किसी को जीवन के उतार-चढ़ाव से गुज़रना पड़ता है। लेकिन पूर्ण सत्गुरु अपना पूरा जीवन हम इंसान के दुख-दर्द कम करने के लिए समर्पित कर देते हैं। वो निस्वार्थ भाव से दूसरों की मदद करते हैं, और उनकी तकलीफ़ों को अपने ऊपर भी ले लेते हैं। वो ऐसा करते हैं उस प्रेम को दूसरों में खुले दिल से लुटाकर जो उन्होंने अपने जीवन में पाया है। ये दिव्य प्रेम हमारी आत्मा को पोषित करता है, और फिर इस संसार में रहते हुए भी हम सदा-सदा रहने वाला आनंद और ख़ुशियाँ पा सकते हैं। हमें सभी परिस्थितियों में याद रखना चाहिए कि हमें जो कुछ भी मिलता है, उसके पीछे प्रभु का ही हाथ होता है।

प्रभु की अपार दया को प्राप्त करने के नाते, ये हमारी भी ज़िम्मेदारी है कि हम उन देनों को ग्रहण करें और फिर उन्हें दूसरों के साथ भी बाँटें। अपने 2023 थैंक्सगिविंग सत्संग का अंत करते हुए महाराज जी ने सबको याद दिलाया कि ध्यानाभ्यास के द्वारा अंतर में सच्चे प्रेम से भरपूर मंडल हमारी प्रतीक्षा कर रहे हैं।