अगर संत न होते

अक्टूबर 22, 2022

संत-सत्गुरु हमारे लिए क्या करते हैं? उनकी हमारे जीवन में क्या भूमिका है? आज के अपने सत्संग में, संत राजिन्दर सिंह जी महाराज ने समझाया कि हम संतों की भूमिका को कैसे समझ सकते हैं। उन्होंने फ़र्माया कि सबसे पहले हमें इंसानी दशा को समझना चाहिए। हमें लगता है कि हम केवल शरीर और मन ही हैं, तथा हम केवल सांसारिक दायित्वों को निभाने के लिए और इस दुनिया के मनोरंजनों का आनंद लेने के लिए ही यहाँ आए हैं। लेकिन इंसान होने के नाते, हमारे जीवन का अर्थ इससे कहीं बढ़कर है। असल में हमारा सच्चा स्वरूप हमारी आत्मा ही है। हम आत्मा हैं, परमात्मा का अंश हैं, जो अपने स्रोत से अलग हो चुके हैं। हमारी आत्मा अपने सच्चे घर जाने के लिए तड़प रही है, लेकिन हम इस संसार में फँस चुके हैं और अपना मार्ग भूल चुके हैं। हम नहीं जानते हैं कि हमें अपने सच्चे घर वापस जाने के लिए कदम उठाना है, जहाँ सदा-सदा का प्रेम, ख़ुशियाँ, और आनंद हमारी प्रतीक्षा कर रहा है।

संत हमें इस सच्चाई की याद दिलाने के लिए आते हैं। हमें ध्यानाभ्यास की तकनीक सिखाकर, वे हमें आंतरिक आध्यात्मिक यात्रा पर जाने में मदद करते हैं, ताकि हम ख़ुद को आत्मा के रूप में जान सकें, और अपनी आत्मा के परमात्मा से अलग हो जाने के दर्द के प्रति जागरूक हो सकें। एक सत्गुरु हमें यह एहसास कराते हैं कि यह मानव चोला हमारी आत्मा के लिए सुनहरा अवसर है जिसमें वो अपने सच्चे घर वापस लौट सकती है। तब हम अपने जीवन के उद्देश्य को समझ पाते हैं, और उसे पूरा करने का निश्चय कर पाते हैं। संत हमें अपने संरक्षण में ले लेते हैं, और प्रेम व करुणा से काम करते हुए हमें एक ब्लूप्रिन्ट देते हैं जिससे हम प्रभु के पास वापस लौट सकते हैं।