प्रभु को चुनने से ज़िंदगी ख़ूबसूरत हो जाती है

अगस्त 4, 2024

आज लाइल, इलिनोई के एस.ओ.एस. इंटरनेशनल मेडिटेशन सेंटर में अपने सत्संग में, संत राजिन्दर सिंह जी महाराज ने समझाया कि मानव चोले में मिले सीमित समय में हमें अपने ध्यान को उस चीज़ की ओर लगाना चाहिए जो असल में महत्त्वपूर्ण है। अपने जीवन की हर अवस्था में हम अपने लिए कोई न कोई लक्ष्य तय करते हैं, और अपना ज़्यादातर समय इन लक्ष्यों की ओर बढ़ने में ही लगा देते हैं। हम ख़ुद को दुनिया में अच्छी पोज़ीशन पर पहुँचाना चाहते हैं, अपने शरीर को स्वस्थ और फ़िट रखना चाहते हैं, दुनियावी दौलत और साज़ो-सामान इकट्ठे करना चाहते हैं, मज़बूत रिश्ते बनाना चाहते हैं, और संसार के अन्य क्षेत्रों में भी तरक्की करना चाहते हैं। लेकिन जब हम एक दिन इस संसार को छोड़कर जायेंगे, तो इस संसार के सभी लक्ष्य भी यहीं पीछे छूट जायेंगे।

हमें ये जानना चाहिए, महाराज जी ने फ़र्माया, कि इस दुनिया में सबकुछ क्षणिक और अस्थाई है, और इस दुनिया की कोई भी भौतिक चीज़ हमारी आत्मा को उसके लक्ष्य तक पहुँचने में मदद नहीं कर सकती है। इसके बजाय, हमें अपने जीवन के सच्चे उद्देश्य की ओर ध्यान केंद्रित करना चाहिए, जो प्रभु के साथ एकमेक होना। एक बार जब हम अपने आध्यात्मिक लक्ष्य को जान लेते हैं, तो फिर हमें उस लक्ष्य की ओर नियमितता से बढ़ते जाना चाहिए, और रास्ते में आने वाली रुकावटों और आकर्षणों के कारण रुक नहीं जाना चाहिए। प्रलोभन के सामने भी हमें अपने विश्वास में दृढ़ बने रहना चाहिए। हमारे अंदर प्रभु के लिए अटल और अडिग विश्वास होना चाहिए, और ये भरोसा रखना चाहिए कि प्रभु हमें वो देते हैं जिसकी हमें ज़रूरत होती है और जब ज़रूरत होती है।

संत राजिन्दर सिंह जी ने फ़र्माया कि रूहानियत का मार्ग हमें समझाता है कि हम सकारात्मक अध्यात्म का जीवन जियें – इस दुनिया में रहें, अपनी ज़िम्मेदारियों को निभायें, और जीवन के सभी पहलुओं में तरक्की करें, लेकिन प्रभु के साथ एकमेक होने के अपने आध्यात्मिक लक्ष्य को सबसे ऊपर रखें। जब हमारी इच्छा प्रभु पर एकाग्र और तीव्र होगी, तो हमें एक बेहद ख़ूबसूरत ज़िंदगी मिलेगी।