संत राजिन्दर सिंह जी महाराज का बिलखौरा में सत्संग

अक्टूबर 4, 2023

आज संत राजिन्दर सिंह जी महाराज और माता रीटा जी दिल्ली से 120 किमी. दक्षिण-पूर्व में स्थित बिलखौरा गाँव में पधारे। आगमन पर महाराज जी व माता जी ने विशाल पंडाल में प्रवेश किया, जो भारी संख्या में देश-विदेश से आई संगत के लिए लगाया गया था। कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए माता जी ने धर्मग्रंथों से एक शब्द प्रस्तुत किया, जिसमें आत्मा की भटकन और तड़प का ज़िक्र था, और बताया गया था कि परमात्मा के पास वापस पहुँचने के लिए आत्मा को कौन से कदम उठाने चाहियें। अपने सत्संग में महाराज जी ने इस विषय की व्याख्या की और इंसानी दशा के बारे में बताया।

हम पूरा जीवन दुनिया की चीज़ों के पीछे भागते रहते हैं, महाराज जी ने फ़र्माया। हमारे कार्य एक के बाद एक अपनी इच्छाओं को पूरा करने के लिए ही होते हैं। ख़ुद को दूसरों से अलग और बेहतर समझते हुए, हम हर चीज़ सिर्फ़ अपने लिए ही पाना चाहते हैं, और उन्हीं को पाने की भागदौड़ में लगे रहते हैं। हम हर काम अपनी शारीरिक, मानसिक, और भावनात्मक ज़रूरतों को पूरा करने के लिए ही करते हैं। हम देखने, सुनने, सूँघने, चखने, और छूने की इंद्रियों द्वारा अलग-अलग दिशाओं में खिंचते रहते हैं। एक पेंडुलम की तरह हम सुख और दुख की अवस्थाओं के बीच झूलते रहते हैं।

जब हमें कुछ मिल जाता है, तो हम गर्व करने लगते हैं, और जब हमसे कुछ छिन जाता है, तो रोने लगते हैं। हम इंद्रियों के भागों-रसों में इतने अधिक खो जाते हैं कि प्रभु को भूल जाते हैं, और सारा समय केवल इंद्रियों के आनंद में ही लगा देते हैं। अगर हम प्रभु को याद करते भी हैं, तो केवल मुसीबत के समय में, या जब हमें अपनी ओर से पूरी कोशिश करने के बावजूद वो नहीं मिलता जो हम चाहते हैं।

संत राजिन्दर सिंह जी ने समझाया कि इस माया के मंडल से परे भी ऐसे मंडल हैं जो प्रभु के प्रेम, प्रकाश, और आनंद से भरपूर हैं। हम सब इन मंडलों का अनुभव कर सकते हैं अगर हम ध्यानाभ्यास के द्वारा अपने ध्यान को बाहरी संसार से हटाकर, अपने अंतर में एकाग्र कर लें। ध्यानाभ्यास की स्थिरता में हमारी आत्मा, जोकि हमारा सच्चा स्वरूप है, प्रभु के प्रेम का अनुभव करने लगती है।

इस धरती पर सबकुछ अस्थाई है। हमें यहाँ ख़ुद को मिले समय को प्रभु को ढूंढने के लिए, प्रभु को पहचानने के लिए, और प्रभु के पास वापस पहुँचने के लिए इस्तेमाल करना चाहिए।