ध्यानाभ्यास के द्वारा मन को डीटॉक्स करें
इस दोपहर, संत राजिन्दर सिंह जी महाराज ने समझाया कि ऐसे कई टॉक्सिन्स (विषैले पदार्थ और अशुद्धियाँ) हैं जो हमारे शरीर, मन, और भावनाओं पर असर डालते हैं। पिछले कुछ दशकों से, शरीर को डीटॉक्स (विषैले पदार्थों और अशुद्धियों को दूर करना) करने पर बहुत ज़ोर दिया जा रहा है, ताकि हमारे शरीर से वो टॉक्सिन्स बाहर निकल जायें जो हमारी जीवनशैली के कारण हमारे शरीर में घर कर जाते हैं। लेकिन इस बात का एहसास होना भी ज़रूरी है कि कुछ टॉक्सिन्स जो हमारे शरीर पर असर डालते हैं, वो असल में हमारे मन द्वारा पैदा होते हैं। मन के ये टॉक्सिन्स जीवन के विभिन्न क्षेत्रों से आ सकते हैं – कार्यस्थल से, रिश्ते-नातों से, पास-पड़ोस से। लेकिन ये केवल हमारे शारीरिक रिश्ते-नातों और बातचीत से ही नहीं आते हैं। ये टॉक्सिन्स आम दुनिया से भी हमारे अंदर आ सकते हैं। संसार में होने वाली घटनाएँ हमारे अंदर भय, तनाव, और व्यग्रता पैदा कर सकती हैं, जिससे हमारे शरीर पर असर पड़ सकता है।
मन के ये टॉक्सिन्स हमें अपने असली लक्ष्य तक पहुँचने से रोकते हैं, जो है प्रभु के पास वापस पहुँचना। इस समस्या के समाधान के लिए हमें टॉक्सिन्स की जड़ तक पहुँचना होगा, और इस काम में ध्यानाभ्यास हमारी सहायता करता है। ध्यानाभ्यास हमारा ध्यान उन टॉक्सिन्स से हटाने में मदद करता है जो हमें अपने अंतर के खज़ानों – शांति, खुशी, व सुख-चैन – पर ध्यान टिकाने से रोकते हैं। ध्यानाभ्यास हमें प्रभु के प्रेम के साथ जुड़ने में मदद करता है। जब हम इस दिव्य प्रेम का अनुभव करने लगते हैं, तो यह हमें मज़बूत बना देता है, जिससे हम बाहरी संसार की हलचलों का सामना बेहतर तरीके से कर पाते हैं।