सकारात्मक अध्यात्म का जीवन
कृपाल बाग़, दिल्ली में 13 फरवरी के कार्यक्रम में संत राजिन्दर सिंह जी महाराज ने समझाया कि प्रभु के पास वापस जाने के लिए हमें सकारात्मक अध्यात्म का जीवन जीना चाहिए। आध्यात्मिक मार्ग यह नहीं कहता कि हम अपनी सारी ज़िम्मेदारियों को त्याग दें और इस दुनिया से बैराग ले लें। बल्कि प्रभु के पास वापस जाने वाली यात्रा पर हमें एक ऐसा जीवन जीने की आवश्यकता है जिसमें हम प्रभु को पाने के साथ-साथ अपनी सांसारिक ज़िम्मेदारियों को भी निभायें। हमें प्रेम, सच्चाई, अहिंसा, नम्रता, और निष्काम सेवा जैसे सद्गुणों को धारण करने की आवश्यकता है।
रोज़ाना ध्यानाभ्यास के द्वारा हम जीवन के सच्चे लक्ष्य को समझने लग जाते हैं, और यह भी जान जाते हैं कि हमें कौन से विकल्प चुनने चाहियें। जब हमारी समझ सही और साफ़ होती है, तो बाहरी संसार की कोई भी चीज़ हमें डगमगा नहीं पाती है।
जब हम प्रभु पर केंद्रित सकारात्मक अध्यात्म का जीवन जीते हैं, तो कई बार हमारे आसपास के लोग हमारी जीवनशैली और दैनिक गतिविधियों पर सवाल उठाने लगते हैं। लेकिन हमें प्रभु के पास वापस जाने वाले मार्ग पर दृढ़ रहना चाहिए और डगमगाना नहीं चाहिए।