भविष्य उज्ज्वल है
यह इंसानी प्रवृत्ति है कि हम हमेशा अतीत में ही ध्यान केंद्रित रखते हैं। हम उस दर्द को बार-बार याद करते रहते हैं जब चीज़ें हमारी मर्ज़ी के मुताबिक नहीं हुई थीं, और अक्सर हमें कुछ करने का या न करने का पछतावा होता है। लेकिन अतीत, जिसे हम बदल नहीं सकते हैं, पर ध्यान केंद्रित करने से हमें मिलता क्या है? आज के अपने ग्लोबल मेडिटेशन प्लेस सत्संग में, संत राजिन्दर सिंह जी महाराज ने समझाया कि जब हम अतीत में जीते हैं, तो हम वर्तमान क्षण के उपहार को ज़ाया कर देते हैं। हम प्रभु द्वारा दी गई समय की पूँजी को नष्ट कर देते हैं जो हमें इस जीवन के परम उद्देश्य – अपने सच्चे आत्मिक स्वरूप का अनुभव करना और अपनी आत्मा का मिलाप परमात्मा में करवाना – को पूरा करने के लिए मिली थी। अतीत की ओर देखने के बजाय, हमें वर्तमान क्षण से पूरा-पूरा लाभ उठाना चाहिए। हमें सकारात्मक रहना चाहिए और भविष्य पर एकाग्र रहना चाहिए, जो ख़ुशी, प्रेम, और प्रकाश की उम्मीद देता है।
हम यह सुनिश्चित कैसे कर सकते हैं कि भविष्य में हमारी ये उम्मीदें पूरी हों? ऐसा हम कर सकते हैं आज मिले समय से पूरा-पूरा लाभ उठाकर। सबसे पहले, हमें एक नैतिक जीवन जीना चाहिए, जिसमें हम किसी को नुकसान न पहुँचायें, और दूसरों के जीवन में ख़ुशियाँ लायें; एक नैतिक जीवन ही अध्यात्म की पहली सीढ़ी है। दूसरे, हमें हर दिन समय निकालकर अपने ध्यान को बाहरी संसार के आकर्षणों से हटाना चाहिए, जो हमें अपने लक्ष्य तक पहुँचने से रोकते हैं। हमें अपने ध्यान को बाहरी संसार से हटाकर अंतर में एकाग्र करना चाहिए, जहाँ केवल प्रकाश ही प्रकाश है। जब हम ध्यानाभ्यास के द्वारा अपने शरीर और मन को स्थिर कर लेते हैं, तो हमारी आत्मा प्रभु के प्रेम के संपर्क में आ जाती है, जो हमें ख़ुशियों व आनंद से भरपूर कर देता है। प्रभु के प्रेम के साथ जुड़ने से हमारी आत्मा पर पड़े आवरण उतर जाते हैं, जो इसकी सुंदरता को ढक रहे हैं, ताकि हमारी आत्मा अपने मौलिक प्रकाश में चमक उठे। जब हम प्रभु की ओर कदम बढ़ाते हैं, तो हम यह सुनिश्चित कर लेते हैं कि हमारा भविष्य उज्ज्वल होगा।