अपनी मुस्कान पहनना न भूलें
दिल्ली में कृपाल बाग़ में अपने सत्संग में, संत राजिन्दर सिंह जी महाराज ने एक आसान तरीके की ओर ध्यान दिलाया जिसके द्वारा हम ख़ुद अपनी मदद कर सकते हैं और दुनिया में ख़ुशियाँ ला सकते हैं: हमेशा अपनी मुस्कान पहने रहें। हम चाहे किसी भी मुश्किल या चुनौती का सामना कर रहे हों, लेकिन जब हम मुस्कराते हैं, तो हम अपने वातावरण में ख़ुशियाँ ले आते हैं। हमारी मुस्कान हमारे पहनावे का सबसे महत्त्वपूर्ण हिस्सा होती है। समस्याओं पर चिंतित होते रहने से उनका समाधान नहीं हो जाता है, बल्कि वे और भी ज़्यादा गंभीर लगने लगती हैं। इसके बजाय, जब हम अपनी समस्याओं का सामना एक मुस्कान के साथ करते हैं, तो हम उनसे बेहतर तरीके से निपट पाते हैं।
लेकिन हम सच्चे दिल से कैसे मुस्करा सकते हैं जब ज़िन्दगी हमारी मर्ज़ी के मुताबिक न चल रही हो? जब हम यह जान जाते हैं और स्वीकार कर लेते हैं कि मुश्किलें, दुख-दर्द, और परेशानियाँ जीवन का एक अंग हैं, तो हम ज़्यादा आसानी से मुस्करा पाते हैं। यह सही समझ तब आती है जब हम अपने अस्तित्व की असलियत को जान जाते हैं – कि हम केवल यह शरीर, मन, या बुद्धि नहीं हैं। यह जागृति हम में तब आती है जब हम ध्यानाभ्यास करते हैं। ध्यानाभ्यास के द्वारा हम अपने सच्चे स्वरूप का, अपनी आत्मा का, अनुभव कर पाते हैं। जब हम ध्यानाभ्यास में प्रभु के प्रेम और प्रकाश के साथ जुड़ जाते हैं, तो हम अपने अंदर मौजूद ख़ुशी और आनंद के अंतहीन स्रोत के साथ जुड़ जाते हैं। जब ऐसा होता है, और जब हम ख़ुद को प्रभु से जोड़ लेते हैं, तो सांसारिक समस्याएँ पृष्ठभूमि में चली जाती हैं, और हम जीवन के उतार-चढ़ाव से गुज़रते हुए भी मुस्कराते रहते हैं। इस प्रक्रिया में, हम अपने आसपास के संसार में भी प्रेम और ख़ुशियाँ बाँटते चलते हैं।