इस थैंक्सगिविंग पर प्रभु का शुक्राना करें
इस दोपहर, पूरे विश्व से अनेकों जिज्ञासु लाइल, इलिनाई, के शैरेटन होटल लाइल में एकत्रित हुए, ताकि संत राजिन्दर सिंह जी महाराज के साथ 2022 के चार-दिवसीय थैंक्सगिविंग (धन्यवाद पर्व) कार्यक्रम में भाग ले सकें। इस कार्यक्रम के अपने पहले सत्संग में महाराज जी ने सभी का स्वागत किया। उन्होंने उत्तरी अमेरिका के इस त्यौहार के असली महत्त्व के बारे में बताया, जो हर साल नवम्बर के अंतिम बृहस्पतिवार को मनाया जाता है।
थैंक्सगिविंग एक ऐसा समय है जब हम अपने जीवन में मिली देनों के लिए शुक्राना करते हैं, और उन देनों को दूसरों के साथ बाँटते हैं; यह उपहार देने का समय होता है। इस दुनिया के सभी उपहारों में से जो सबसे बड़ा उपहार हम दे या ले सकते हैं, वो है प्रेम। इसीलिए हमें साल के इस समय पर, और पूरे साल भी, दूसरों के साथ प्रेम बाँटना चाहिए। इसीलिए, थैंक्सगिविंग प्रेम का त्यौहार भी है। इसमें हम अपने जीवन के सभी लोगों के प्रति प्रेम और कृतज्ञता दर्शाते हैं, वहीं इस दिन हमें अपने सबसे बड़े दाता, प्रभु, का भी शुक्राना करना चाहिए, उन सभी देनों के लिए जो उन्होंने हमें बख़्शी हैं।
प्रभु को हमसे कुछ भी नहीं चाहिए, सिवाय हमारे प्रेम के, क्योंकि यह प्रेम ही है जो हमें प्रभु के पास वापस ले जाता है। प्रभु के प्रति प्रेम विकसित करने के लिए हमें पहले प्रभु के प्रेम का अनुभव करना होगा। ऐसा तब होता है जब हम ध्यानाभ्यास के द्वारा अपने ध्यान को बाहरी संसार से हटाकर अपने अंतर में एकाग्र करते हैं। ऐसा करने से हम प्रभु की दिव्य ज्योति व श्रुति के साथ जुड़ जाते हैं, तथा स्थिरता, शांति, प्रेम, सुंदरता, ख़ुशी, व आनंद का अनुभव करने लगते हैं। जब हम रोज़ाना समय निकालकर मौन अवस्था में बैठते हैं और अपने मन को शांत करते हैं, तो हम प्रभु के प्रेम और दया-मेहर को अनुभव करने लगते हैं। हम अपने जीवन में प्रभु की उपस्थिति को अनुभव करने लगते हैं, तथा रोज़ाना की छोटी से छोटी चीज़ों में भी प्रभु का हाथ व दया देखने लगते हैं, जो आम तौर पर हम देख नहीं पाते हैं।
जितना अधिक हम ध्यानाभ्यास करते हैं, और प्रभु के प्रेम व उपस्थिति का अनुभव करते हैं, उतना ही अधिक हम जीवन को एक उच्चतर दृष्टिकोण से देखने लगते हैं जो हर क्षण हमें प्रभु की याद दिलाता है। तब, जैसे एक फलों से लदा हुआ पेड़ झुक जाता है, वैसे ही हम भी शुक्राने और नम्रता में अपना सिर झुकाना सीख लेते हैं, क्योंकि हम अपने जीवन में उन सभी वरदानों के प्रति जागरूक हो जाते हैं जो प्रभु की देन हैं।