प्रभु के प्रति शुक्राने का भाव विकसित करें
आज संत राजिन्दर सिंह जी महाराज ने अगली विश्व यात्रा पर जाने से पूर्व अपनी वर्तमान शिकागो यात्रा का अंतिम रविवारीय सत्संग फ़र्माया। महाराज जी ने उन अनेक देनों के बारे में बताया जो हमें मिली हैं ताकि हम आध्यात्मिक रूप से तरक्की कर सकें। महाराज जी ने फ़र्माया कि हम अहिंसा, करुणा, प्रेम, सच्चाई जैसे सद्गुणों को विकसित करने पर ध्यान देते हैं। लेकिन हम सबसे महत्त्वपूर्ण सद्गुण को तो भूल ही जाते हैं – शुक्राना या कृतज्ञता।
प्रभु का शुक्राना करने से हमारे जीवन में ढेर सारी ख़ुशियाँ आ जाती हैं। एक रोचक कहानी सुनाकर हमें बताया गया कि हमारे पास हमेशा ये विकल्प होता है कि हम जीवन को लेकर आशावादी नज़रिया रखें या निराशावादी। हमारे साथ जो कुछ भी होता है, वो हमारी बेहतरी के लिए ही होता है, चाहे हमें उस वक़्त ये समझ में आए या न आए। लेकिन हम केवल उन्हीं चीज़ों की ओर ध्यान लगाए रहते हैं जो हमारे पास नहीं हैं, या जिन्हें हम पाना चाहते हैं, और उन चीज़ों के लिए शुक्राना करना तो भूल जाते हैं जो प्रभु ने हमें दी हैं।
प्रभु हमसे बेहद प्रेम करते हैं, और उन्होंने हमें बहुत सारे उपहारों से नवाज़ा है। फिर संत राजिन्दर सिंह जी ने प्रभु द्वारा हमें दी गई अनेक देनों के बारे में बताया। सबसे पहली देन है ये मानव चोला, जो ऐसी एकमात्र योनि है जिसमें हमारे पास प्रभु को जानने के सारे पदार्थ मौजूद हैं। इंसान सही और ग़लत के बीच फ़र्क कर सकता है, और प्रभु के पास वापस पहुँच सकता है। दूसरे, इस दुनिया में जी रहे आठ अरब से भी ज़्यादा लोगों में से केवल कुछ ही हैं जिनके अंदर प्रभु को जानने की तड़प पैदा होती है। ऐसे लोग जीवन के गहरे अर्थ के बारे में सोचने लगते हैं, और जीवन के सच्चे अर्थ को ढूंढने के लिए आध्यात्मिक मार्ग पर चल पड़ते हैं। प्रभु के लिए ये तड़प, हमारे जीवन की दूसरी सबसे बड़ी देन है। प्रभु को पाने की सच्ची तड़प खाली नहीं जाती है। प्रभु ऐसी आत्माओं को वक़्त के पूर्ण सत्गुरु के पास पहुँचा देते हैं, जो हमें प्रभु के पास वापस जाने का मार्ग दिखा देते हैं।
संत राजिन्दर सिंह जी ने फ़र्माया कि हमारी ज़िंदगी उससे कहीं बेहतर है जैसा हम सोचते हैं। हम अपने जीवन में आने वाली चुनौतियों से घबरा जाते हैं, लेकिन बाद में पीछे मुड़कर देखने पर हम समझ जाते हैं कि उन चुनौतियों का भी कोई उद्देश्य था। जब हम जीवन में होने वाली हरेक चीज़ के लिए प्रभु का शुक्राना करते हैं, तो हम ‘तेरा भाणा मीठा लागे’ के सिद्धांत के अनुसार जीने लगते हैं, और ये भरोसा रखते हैं कि प्रभु जानते हैं हमारे लिए क्या बेहतर है। जब हम इस ढंग से जीने लगते हैं, तो हमारा जीवन शांत, प्रेमपूर्ण, और सौहार्दपूर्ण हो जाता है। अपने जीवन में प्रभु का अनुभव करने के लिए, और प्रभु की देनों के प्रति शुक्राने का भाव विकसित करने के लिए, हमें शांत अवस्था में बैठना होगा और प्रभु के प्रेम व प्रकाश के साथ जुड़ना होगा।