शांति व ख़ुशी की ओर पहला कदम उठायें

नवम्बर 6, 2022

यूरोप और अमेरिका महाद्वीपों से आए लगभग 2000 श्रोताओं को सम्बोधित करते हुए संत राजिन्दर सिंह जी महाराज ने उस तनाव का ज़िक्र किया जो आज के समय में हमारे जीवन में भरपूर है, चाहे हम कहीं भी रहते हों। जब हम तनाव में जीते हैं, महाराज जी ने फ़र्माया, तो हमारे जीवन में हलचल आ जाती है; और जहाँ हलचल होती है, वहाँ शांति नहीं आ पाती है।

शांति पाने के लिए हमें अपने जीवन में तनाव के कारण का विश्लेषण करना होगा। तनाव ज़्यादातर हमारे सीमित दृष्टिकोण के कारण होता है। अपने जीवन में तनाव को कम करने के लिए हमें अपना दृष्टिकोण, और दुनिया को देखने का अपना नज़रिया, बदलना होगा। हमारे नज़रिये में यह बदलाव तब आता है जब हम बाहरी संसार से ध्यान हटाकर अपने अंतर में एकाग्र करते हैं। जब हम ऐसा करते हैं, तो हम प्रभु के प्रेम व प्रकाश की आंतरिक धारा के साथ जुड़ जाते हैं। यह प्रेम हमें बदल देता है। हम इस सच्चाई के प्रति जागृत हो जाते हैं कि हम केवल शरीर ही नहीं हैं। हम जान जाते हैं कि असल में हम आत्मा हैं, परमात्मा का अंश हैं। हम यह भी समझ जाते हैं कि प्रभु का यही अंश अन्य सभी जीवों को भी जान दे रहा है।

धीरे-धीरे हम एक-दूसरे के साथ अपनी आंतरिक एकता के प्रति जागृत हो उठते हैं। इस एकता को स्वीकार कर लेने से हमारा दृष्टिकोण बदल जाता है। हम दूसरों को अपने ही अंग के रूप में देखने लगते हैं, और हमारे जीवन से समस्त टकराव गायब हो जाता है। जब टकराव गायब हो जाता है, तो शांति को जगह मिल जाती है। जब शांति हमारे अंदर दाखिल होती है, तो हम ख़ुशी से भरपूर हो जाते हैं। शांति व ख़ुशी पाने का पहला कदम है ध्यानाभ्यास के द्वारा अंतर्मुख होना और प्रभु के प्रेम का अनुभव करना, जो हमें एक उच्चतर दृष्टिकोण प्रदान करता है।