ध्यानाभ्यास: हमारी आंतरिक शरणस्थली

अगस्त 25, 2024

संत राजिन्दर सिंह जी महाराज की 2024 यू.के. यात्रा के दूसरे सार्वजनिक सत्संग से लाभ उठाने के लिए बर्मिंगहैम के इंटरनेशनल कन्वैन्शन सेंटर में हज़ारों की संख्या में दुनिया भर से श्रद्धालु एकत्रित हुए। महाराज जी ने समझाया कि जिस प्रेम और ख़ुशी को हम बाहरी संसार में ढूंढते हैं, वो असल में हमारे भीतर ही है। प्रभु के प्रेम का मीठा अमृत सदा हमारे भीतर मौजूद रहता है। इस मीठे अमृत के साथ हम तब जुड़ सकते हैं जब, एक पूर्ण सत्गुरु के मार्गदर्शन में, हम ध्यानाभ्यास के द्वारा आंतरिक मंडलों में यात्रा करते हैं।

जब हम अपने ध्यान को बाहरी संसार से हटाकर अंतर में एकाग्र करते हैं, तो हम प्रभु के प्रेम के साथ जुड़ पाते हैं और अपनी आत्मा का पोषण कर पाते हैं। ध्यानाभ्यास के द्वारा हम अपने जीवन में प्रभु की उपस्थिति का अनुभव करने लगते हैं, और जब ऐसा होता है, तो हमारी समस्त चिंता और डर ख़त्म हो जाता है।

श्रोताओं में मौजूद नए जिज्ञासुओं को सम्बोधित करते हुए संत राजिन्दर सिंह जी ने सबको उस महान उद्देश्य की याद दिलाई जिसके लिए हमें ये मानव चोला दिया गया है। हमें इस सुनहरे अवसर से लाभ उठाकर अपनी आत्मा की मदद करनी चाहिए ताकि वो प्रभु के पास वापस पहुँच सके, और हमारी आत्मा का प्रकाश परमात्मा के परम प्रकाश में लीन हो जाए, जिस तरह सागर की लहरें फिर से सागर में समा जाती हैं। हम ध्यानाभ्यास के द्वारा अपनी आंतरिक शरणस्थली में जा सकते हैं, और वो रोज़मर्रा के जीवन के तनावों और दबावों से हमें राहत और सुरक्षा पहुँचाती है।