आत्मा को पोषित करें

नवम्बर 13, 2022

आज संत राजिन्दर सिंह जी महाराज ने समझाया कि अगर हम उस उद्देश्य को पूरा करना चाहते हैं जिसके लिए हमें यह मानव चोला दिया गया है, तो हमें अपनी आत्मा को पोषित करना होगा। यह स्वाभाविक है कि हम ख़ुद को केवल शरीर और मन ही समझते हैं, क्योंकि हम अपनी भौतिक इंद्रियों के द्वारा केवल इन्हीं को अनुभव कर पाते हैं। इसीलिए हम अपना सारा जीवन शरीर को तंदरुस्त रखने में और मन व दिमाग़ को तेज़ करने में ही बिता देते हैं। लेकिन इस प्रक्रिया में हम अपने अस्तित्व के सबसे महत्त्वपूर्ण भाग को ही भुला देते हैं – जो है हमारी आत्मा, जोकि हमारा सच्चा स्वरूप है।

हमारी आत्मा अपने स्रोत, प्रभु, के साथ एकमेक होने के लिए तड़प रही है। जब हमें यह मानव चोला मिला, तो हमें अपनी आत्मा का प्रभु के साथ मिलाप करवाने का सुनहरा अवसर मिल गया। लेकिन ऐसा तभी हो सकता है जब हम ध्यानाभ्यास के द्वारा अपने ध्यान को बाहरी संसार से हटाकर अपने अंतर में एकाग्र करें। जब हम अंतर्मुख होते हैं, तो हमारी आत्मा प्रभु के प्रेम व प्रकाश के साथ जुड़ जाती है। इस दिव्य धारा के साथ जुड़ने से हमारी आत्मा पोषित होती है, और जब वो पोषित होती है, तो वो खिल उठती है। धीरे-धीरे, जब हम ध्यानाभ्यास में नियमित समय व प्रयास देते रहते हैं, तो हमारी आत्मा, प्रभु की ओर बढ़ती चली जाती है और आख़िरकार अपने स्रोत में जाकर लीन हो जाती है।