ऐ आत्मा, जाग और प्रभु की रौशनी की तलाश कर

सितम्बर 28, 2023

इस शाम, अनेकों जिज्ञासु देहरादून, भारत, में मानव केंद्र की 25 एकड़ भूमि में, संत राजिन्दर सिंह जी महाराज की पावन उपस्थिति से लाभ उठाने के लिए एकत्रित हुए थे। मानव केंद्र को 53 साल पहले संत कृपाल सिंह जी महाराज द्वारा स्थापित किया गया था। आज शाम के सत्संग में महाराज जी ने समझाया कि हमें वो सभी पदार्थ दिए गए हैं जो प्रभु के पास वापस जाने के लिए हमें चाहियें। हमें गहरी नींद से जागना चाहिए तथा इस अवसर से पूरा-पूरा लाभ उठाना चाहिए।

इंसानी दशा कुछ ऐसी है कि प्रभु के प्रकाश का अनुभव करने के बजाय हम अस्थाई बाहरी संसार पर केंद्रित रहकर अंधकार का जीवन गुज़ारते रहते हैं। जहाँ हमारी आत्मा को हमारे मन और इंद्रियों पर राज करना चाहिए था, वहीं असलियत में हमारी भौतिक इंद्रियाँ हमारे मन को नियंत्रित करती हैं। फिर हमारा मन हमारी आत्मा को भटका देता है, और उसे बाहरी संसार के आकर्षणों में ही केंद्रित रखता है, तथा केवल दुनियावी ज्ञान और चीज़ें ही पाना चाहता है।

इंद्रियों के स्तर पर जीते हुए, हम बाहरी आँखों और कानों के ज़रिए प्रभु का अनुभव करना चाहते हैं। लेकिन प्रभु को केवल अंदरूनी आँख के द्वारा अनुभव किया जा सकता है, जोकि रूहानी मंडलों में जाने का प्रवेशद्वार है।

केवल प्रेम और प्रकाश ही हमें हमारे सच्चे घर का रास्ता दिखा सकते हैं, संत राजिन्दर सिंह जी ने फ़र्माया। ध्यानाभ्यास के द्वारा हम अपने ध्यान को बाहरी दुनिया से हटाकर अंतर में एकाग्र कर पाते हैं, ताकि हम आंतरिक प्रकाश और उच्च चेतनता के साथ जुड़ जायें। तब हम अपने सच्चे आत्मिक स्वरूप को, और इस जीवन की सच्चाई को, जान जाते हैं।