समय निकालने के लिए समय निकालें

जून 25, 2022

हम एक ऐसे समय में जी रहे हैं जिसमें करने को बहुत कुछ है, लेकिन उसे करने के लिए पर्याप्त समय नहीं है। हर दिन, हम सूचनाओं के जाल में घिरे रहते हैं; हमें विभिन्न तकनीकी प्लैटफ़ॉर्म्स और तरीक़ों से जानकारियों का अम्बार मिलता रहता है। विश्व-संबंधी या स्वास्थ्य-संबंधी ये जानकारियाँ एकत्रित करने में ही हमारा सारा समय निकल जाता है। लेकिन अक्सर हम अपना ज़्यादातर समय सिर्फ़ इन जानकारियों को इकट्ठा करने में ही बिता देते हैं, और अपने जीवन को बेहतर बनाने के लिए इनका इस्तेमाल नहीं करते हैं। क्या यह हमारे लिए लाभदायक है? क्या हमें अपने समय का ऐसे उपयोग करना चाहिए? हम सबको दिन में 24 घंटे दिए गए हैं। अपने सांसारिक उत्तरदायित्वों को निभाने और अपने शरीर को आराम देने के बाद, हमारे पास करीब छह घंटे बचते हैं। इस समय में हम अपना ध्यान कहाँ लगाते हैं, यही महत्त्वपूर्ण है।

अपने समय का सबसे अच्छा इस्तेमाल करने की कुंजी यह है कि सबसे पहले हम यह समझें कि हमारी प्राथमिकताएँ क्या हैं। हमारे कुछ सांसारिक लक्ष्य हो सकते हैं, महाराज जी ने समझाया, लेकिन इस मानव चोले में आने का हमारा सबसे बड़ा लक्ष्य यही होता है कि हम प्रभु का अनुभव कर सकें और अपनी आत्मा का मिलाप परमात्मा में करवा सकें। एक बार जब हम इस लक्ष्य को जान लेते हैं, और जब हम यह जान लेते हैं कि इसे केवल ध्यान-अभ्यास के द्वारा ही पाया जा सकता है, तो फिर यह हम पर निर्भर करता है कि हम ध्यान-अभ्यास को अपनी दिनचर्या में प्राथमिकता दें। अगर हम ध्यान-अभ्यास को प्राथमिकता नहीं देंगे, और इसके बजाय बाहरी संसार के आकर्षणों में ही फँसे रहेंगे, तो हम अपने सबसे अधिक महत्त्वपूर्ण लक्ष्य को पाने में पीछे हो जायेंगे।

कई राज्य, राजा, व नेता आए और चले गए, संत राजिन्दर सिंह जी ने फ़र्माया। इस दुनिया में सबकुछ अस्थाई है। हम यहाँ केवल थोड़े से समय के लिए ही आए हैं, और हमारे जीवन का एक ख़ास मक़सद है। एक बार जब हम उस लक्ष्य को जान जाते हैं, तो हमें उसे पूरा करने के लिए अपनी ओर से पूरी कोशिश करनी चाहिए। जितना अधिक हम इस ओर ध्यान देंगे, उतनी ही जल्दी हमें सफलता मिलेगी और उतनी ही जल्दी हम प्रभु के पास वापस पहुँच जायेंगे। जब हम ध्यान-अभ्यास करते हैं, तो हम देखते हैं कि हम सांसारिक कामों में भी अधिक कुशल और एकाग्र हो जाते हैं।