जीवन के लक्ष्य को पूरा करने का प्रण लें

जनवरी 15, 2023

एक इंसान और एक बड़े संगठन में क्या समानता होती है? उत्तर: वो दोनों जटिल इकाई होते हैं जिनके अनेक भाग होते हैं, और जिन्हें एक बड़े लक्ष्य को पूरा करने के लिए मिल-जुलकर काम करना होता है।

आज संत राजिन्दर सिंह जी महाराज ने एक विशाल संगठन के कार्य की तुलना हमारे इंसानी जीवन से की। किसी भी कड़ी कम्पनी का एक मिशन स्टेटमेंट या निर्धारित लक्ष्य होता है, और कम्पनी का सी.ई.ओ. (मुख्य कार्यपालक अधिकारी) यह सुनिश्चित करता है कि कम्पनी अपने लक्ष्य को पूरा कर सके। संगठन में विभिन्न विभाग होते हैं, जिनमें से हरेक का एक ख़ास कार्य होता है। यह सी.ई.ओ. की ज़िम्मेदारी होती है कि सभी विभाग आपस में समन्वय से कार्य करें, ताकि कम्पनी अपने उद्देश्यों को पूरा कर सके। जब तक कम्पनी में हर कोई मिल-जुलकर काम करता है, तब तक कम्पनी अच्छे परिणाम दे सकती है। लेकिन अगर विभाग समन्वय के साथ काम नहीं कर पाते हैं, तो कम्पनी के लाभ की दर कम होती जाती है, और वो अपना निर्धारित लक्ष्य पूरा करने में असफल रहती है।

हमारा इंसानी जीवन भी कुछ ऐसा ही है। हमारा भी एक निर्धारित लक्ष्य है: अपनी आत्मा को प्रभु के साथ एकमेक करना। एक बड़ी कम्पनी की तरह ही, हमारे अस्तित्व के भी अलग-अलग पहलू हैं: शरीर, बुद्धि, भावनाएँ, और सबसे बढ़कर, हमारी आत्मा, जोकि हमारा सच्चा स्वरूप है। ये सभी पहलू एक बड़ी प्रणाली के अलग-अलग विभाग हैं। दुर्भाग्यवश, इनमें से हर विभाग के अलग-अलग उद्देश्य हैं, और ये उस बड़े लक्ष्य से अनजान हैं जिसे पाने के लिए इन्हें मिल-जुलकर काम करना चाहिए।

असल में आत्मा को हमारा सी.ई.ओ. होना चाहिए था। यह आत्मा का उत्तरदायित्व है कि शरीर, बुद्धि, और भावनाओं के समन्वित कार्य को सम्भाले व निर्देशित करे। अगर हम अपनी आत्मा से अनजान रहेंगे, तो हमारे उद्यम को उसके लक्ष्य की ओर ले जाने वाला कोई अधिकारी नहीं होगा।

इसे ठीक करने के लिए पहला कदम है कि हमारी आत्मा यह याद करे कि वो प्रभु का अंश है। यह जागृति तभी आ सकती है जब हम अपने ध्यान को बाहरी संसार के आकर्षणों से हटायें। ध्यानाभ्यास के द्वारा हमारी आत्मा हमारे शरीर, बुद्धि, और भावनाओं की सभा बुलाती है। जब ये सब स्थिर हो जाते हैं, तो हमारी आत्मा आंतरिक मंडलों की ख़ुशियों व आनंद का अनुभव करने लगती है। जब हमारी आत्मा ध्यानाभ्यास के द्वारा प्रभु के प्रेम व प्रकाश के साथ जुड़ जाती है, तो वो अपने सच्चे स्वरूप के प्रति जागृत हो उठती है, और उसमें वो शक्ति आ जाती है जो उसे सी.ई.ओ. की अपनी जगह पाने के लिए चाहिए। तब हम के साथ एकमेक होने के अपने लक्ष्य को पूरा कर सकते हैं।