घर में सौहार्द

अक्टूबर 9, 2022

जब से मानव समाज बना है, माता-पिता और बच्चों के बीच हर बात पर सहमति नहीं होती है। जब एक परिवार में एक बच्चा जन्म लेता है, तो वो अपने जीवन के कुछ शुरुआती वर्षों में देखभाल के लिए अपने माता-पिता पर निर्भर होता है। लेकिन बड़े होने पर वो आज़ादी चाहने लगता है और स्वतंत्र रूप से अपने व्यक्तित्व का विकास करता है। इससे माता-पिता और बच्चों के बीच अलग-अलग दृष्टिकोण होने की समस्या पैदा हो सकती है, और उसे समझदारी से निपटाया न जाए तो घर में बहुत हलचल पैदा हो सकती है। तो माता-पिता और बच्चों के बीच प्रेम व सौहार्द से भरपूर रिश्ते का विकास कैसे हो सकता है?

सबसे पहले तो यह याद रखना ज़रूरी है, संत राजिन्दर सिंह जी महाराज ने फ़र्माया, कि माता-पिता अपने बच्चों से बहुत प्रेम करते हैं, और हर समय उन्हें सहारा व सुरक्षा देना चाहते हैं। उनका मार्गदर्शन, उनकी ख़ुद की पृष्ठभूमि पर निर्भर करता है, और वो चाहते हैं कि उनके बच्चों को उन तकलीफ़ों से न गुज़रना पड़े जिनसे शायद कभी वो गुज़रे थे। लेकिन अगर यह मार्गदर्शन कड़े शब्दों में या बेसब्री से दिया जाए, तो वो गलतफ़हमी पैदा कर सकता है, और बच्चे शायद यह समझ सकते हैं कि उनके माता-पिता उनसे प्यार नहीं करते हैं। जब बच्चों को लगता है कि उन्हें समझा नहीं जा रहा या उनसे प्यार नहीं किया जा रहा, तो वो प्रतिक्रिया करते हैं, जिससे दोनों पक्षों को गुस्से और हलचल का सामना करना पड़ता है।

माता-पिता और बच्चों के बीच सौहार्द के लिए दोनों पक्षों को अपनी-अपनी भूमिका अदा करना ज़रूरी है। माता-पिता को यह जानना चाहिए कि दुनिया तब से बहुत बदल चुकी है जब वो जवान थे, तथा उन्हें बदलते हुए वातावरण के साथ ख़ुद को ढाल लेना चाहिए, लचीला बनाना चाहिए, तथा खुले विचार रखने चाहियें। बच्चों को भी यह समझना चाहिए कि उनके माता-पिता के कार्य उनके प्रति प्रेम के कारण ही हैं, तथा उन्हें अपने माता-पिता का आदर करना चाहिए।

कोई भी समस्या होने पर दोनों पक्षों को शांति व प्रेम के साथ एक-दूसरे से बात करनी चाहिए। माता-पिता को अपनी सलाह के पीछे के कारणों को समझाना चाहिए, तथा बच्चों के विचारों को भी जानना चाहिए व उन पर चर्चा करनी चाहिए। बच्चों को भी अपने विचार आदरपूर्वक पेश करने चाहियें। ऐसा करने से समस्या का शांतिपूर्ण समाधान हो सकता है और घर में सौहार्द बना रह सकता है। इसके साथ ही, अगर माता-पिता घर में रोज़ाना ध्यानाभ्यास में बैठते हैं, तो बच्चे भी उन्हें देखकर ऐसा ही करेंगे, जिससे शांति व प्रेम से भरपूर वातावरण पैदा होगा, जिसमें सौहार्दपूर्ण रिश्ते पनपेंगे।