सही दृष्टिकोण का विकास

अप्रैल 9, 2022

आज संत राजिन्दर सिंह जी महाराज जीवन में सही दृष्टिकोण के विकास के बारे मे बताया। इस भौतिक संसार के निवासी होने के नाते, हम इस बाहरी जगत को ही सच समझते रहते हैं, महाराज जी ने फ़र्माया। हम अपने सीमित ज्ञान और दृष्टिकोण के द्वारा ही चीज़ों को देखते व समझते हैं, तथा सोचते हैं कि जो कुछ भी हम अपनी देखने, सुनने, सूंघने, चखने, और छूने की पांच इंद्रियों के द्वारा ग्रहण कर रहे हैं, वही सच है। लेकिन संत-महापुरुष हमें बताते हैं कि इस भौतिक संसार से परे भी मंडल हैं – दिव्य सुंदरता, चेतनता और जागृति से भरपूर रूहानी मंडल।

हम अंतर में प्रतीक्षा कर रही असीम खुशियों व परमानंद से अनजान हैं, क्योंकि हम बाहरी संसार से जुड़े हुए हैं। हमें रूहानी मंडलों का अनुभव करने के लिए पैदा किया गया है, लेकिन हमारा मन हमें बाँधे रखता है। हमारा मन हमें बाहरी संसार के दृश्यों और आवाज़ों में उलझाए रखता है। जब हमारे दृष्टिकोण में बदलाव आता है और ध्यानाभ्यास के द्वारा प्रभु की ज्योति का अनुभव कर लेते हैं, तो हमारी आत्मा खुद को जान जाती है।