ध्यानाभ्यास के द्वारा अपने जीवन को आलोकित करें

अप्रैल 28, 2024

लाइल, इलिनोई, के साइंस ऑफ़ स्पिरिच्युएलिटी मेडिटेशन सेंटर में रविवार के अपने सत्संग में, संत राजिन्दर सिंह जी महाराज ने मानव चोले के सुनहरे अवसर के बारे में बताया, जिससे लाभ उठाकर हम इसी जीवन में प्रभु के पास वापस पहुँच सकते हैं।

 जब हम ज़िन्दगी में चुनौतियों का सामना करते हैं, तो हम कई बार उनसे हार मान लेते हैं, और अपने मार्ग से भटक जाते हैं। हम चिंता करते रहते हैं, और इस डर में जीते हैं कि न जाने भविष्य में क्या होगा। महाराज जी ने फ़र्माया कि चिंता से केवल हमारा समय और ऐनर्जी ज़ाया होती है। चिंता करने से कोई हल नहीं निकलता है। इससे बचने का तरीका है, उन्होंने समझाया, अपने आसपास होने वाली चीज़ों से प्रभावित न होना। उन्होंने जीवन की चुनौतियों का सामना करते समय सकारात्मक चीज़ों की ओर ध्यान देने के महत्त्व की याद दिलाई। हमें हर अनुभव के पीछे छुपी आध्यात्मिक सीख की ओर ध्यान देने का कौशल और आदत विकसित करनी चाहिए।

जब हम अपने विचारों को नियंत्रित करना, मन को स्थिर करना, और ध्यानाभ्यास के द्वारा अपना ध्यान प्रभु की ओर लगाना सीख जाते हैं, तो हम प्रभु के प्रकाश का अनुभव कर पाते हैं, जिसमें हमारे जीवन को रौशन करने और परिवर्तित कर देने की शक्ति होती है। तब हम अनंत ख़ुशी और आनंद में नहा जाते हैं, जो बाहरी संसार के सभी दुखतकलीफ़ों पर ग्रहण लगा देता है। ध्यानाभ्यास में प्रभु का सीधा अनुभव प्राप्त करने से प्रभु में हमारा विश्वास भी मज़बूत हो जाता है। हम अपने जीवन में प्रभु की उपस्थिति को पहचानना सीख जाते हैं, और जान जाते हैं कि प्रभु हर पल हमें सहारा दे रहे हैं। प्रभु के अनंत प्रेम का सहारा पाकर, हम जीवन से बिना किसी डर और चिंता के गुज़रने लगते हैं।

 इस दुनिया में हमारी सबसे कीमती पूँजी है हमें मिला समय। लेकिन आज के युग में हम हर वक़्त कई आकर्षणों और भटकावों से घिरे रहते हैं – ये वो चोर हैं जो हमारे समय पर अपना अधिकार जमा लेते हैं और हमारी अनमोल पूँजी को नष्ट करते रहते हैं। अगर हम अपने परम उद्देश्य में सफल होना चाहते हैं, हमें ऐसे तरीके विकसित करने चाहियें जो हमें इन आकर्षणों में घिरने से बचाए रखें, ताकि हम बिना रुके अपने आध्यात्मिक लक्ष्य की ओर आगे बढ़ते जायें।