ध्यानाभ्यास के द्वारा व्यग्रता पर काबू पायें

मई 28, 2022

इस दोपहर, संत राजिन्दर सिंह जी महाराज ने लाइल, इलिनोई के एस.ओ.एस. इंटरनेशनल मेडिटेशन सेंटर में एकत्रित श्रोताओं के आध्यात्मिक प्रश्नों के उत्तर दिए। इस प्रश्न का उत्तर देते हुए कि ध्यानाभ्यास हमें व्यग्रता पर काबू पाने में कैसे सहायता कर सकता है, महाराज जी ने समझाया कि व्यग्रता हमारे जीवन में तब आती है जब चीज़ें हमारी अपेक्षाओं के विरुद्ध होती हैं। ऐसा तब होता है जब हम अतीत की किसी दुखदायी घटना को याद करते हैं, या जब हमें अपने किसी निर्णय या कार्य पर पछतावा होता है, या जब हम अपने या अपने किसी प्रियजन के भविष्य को लेकर चिंतित होते हैं, या ऐसी कोई भी अन्य परिस्थिति जब ज़िन्दगी हमारे मुताबिक न चल रही हो।

व्यग्रता या बेचैनी का कारण चाहे जो भी हो, यह एक ऐसा ज़हर है जो हमारे मन को प्रदूषित कर देता है। यह हमारे मन में हलचल पैदा कर देता है, और हम पर भावनात्मक व शारीरिक प्रभाव डालता है। यह ज़रूरी है कि हम बेचैनी को एक मानसिक अशुद्धि के रूप में पहचानें, और यह भी जानें कि इस पर काबू पाने के तरीके भी हैं। ध्यानाभ्यास, संत राजिन्दर सिंह जी ने फ़र्माया, ऐसा ही एक तरीका है जिससे हम अपनी व्यग्रता पर काबू पा सकते हैं। ध्यानाभ्यास में, हम अपना ध्यान अपने भीतर मौजूद खुशी व प्रेम के स्रोत पर एकाग्र करते हैं। हम अपने जीवन में प्रभु की उपस्थिति को महसूस करने लगते हैं और प्रभु के प्रेम में चैन पाते हैं, ठीक वैसे ही जैसे हम जीवन में अपने माता-पिता, पति-पत्नी, और अन्य करीबियों के प्रेम में चैन पाते हैं। हम जान जाते हैं कि एक सहारा हर वक़्त हमारे साथ है, क्योंकि प्रभु हर वक़्त हमारे साथ हैं। जैसे-जैसे हम प्रभु के प्रेम व प्रकाश के साथ और अधिक जुड़ते जाते हैं, वैसे-वैसे हमारी नकारात्मकता ख़त्म होने लगती है। ध्यानाभ्यास के द्वारा हम अपने जीवन में व्यग्रता की भावनाओं पर काबू पा सकते हैं।