प्रभु में विश्वास

प्रभु में विश्वास

प्रभु में विश्वास संत राजिन्दर सिंह जी महाराज 29 अक्टूबर 2020 प्रभु के अदृश्य हाथ की सुंदरता यह है कि कई बार हम सहायता के लिए बहुत अधिक प्रार्थनाएँ करते हैं और हमें वो मिलती भी है। लेकिन कई बार जब हम सहायता माँगते नहीं हैं, तब भी हमें सहायता मिलती है। ऐसे मौके हमें...
प्रेम की खुश्बू को फैलायें

प्रेम की खुश्बू को फैलायें

प्रेम की खुश्बू को फैलायें संत राजिन्दर सिंह जी महाराज 21 जुलाई 2020 एक ख़ूबसूरत कथन है, “मुस्कराने में पैसे नहीं लगते हैं।” आपकी मुस्कान किसी इंसान के जीवन में उजाला ला सकती है। फिर वो इंसान अपने से मिलने वाले अन्य लोगों में भी ख़ुशियाँ बाँट सकता या सकती है। यह चक्र...
ध्यानाभ्यास में नियमितता

ध्यानाभ्यास में नियमितता

ध्यानाभ्यास में नियमितता संत राजिन्दर सिंह जी महाराज 9 जून 2020 जब हम रोज़ाना ध्यानाभ्यास करते हैं, तो हम इसमें निपुण होते जाते हैं और अंततः इच्छित परिणामों को पा लेते हैं। कई बार, हम दिन-ब-दिन बैठते तो ज़रूर हैं, लेकिन हमें लगता है कि हम तरक्की नहीं कर रहे हैं। लेकिन...
विचारों में अहिंसा

विचारों में अहिंसा

विचारों में अहिंसा संत राजिन्दर सिंह जी महाराज 14 अक्टूबर 2020 आध्यात्मिक रूप से विकसित होने के लिए अहिंसा एक महत्त्वपूर्ण सद्गुण है। इसका मतलब है कि हम विचारों से, वचनों से, और कार्यों से किसी भी जीव को नुकसान न पहुँचायें। जहाँ तक विचारों में अहिंसा की बात है, दूसरों...
ध्यानाभ्यास एक प्रयासरहित प्रयास है

ध्यानाभ्यास एक प्रयासरहित प्रयास है

ध्यानाभ्यास एक प्रयासरहित प्रयास है संत राजिन्दर सिंह जी महाराज 22 अक्टूबर 2020 ध्यानाभ्यास में, हम अपनी शारीरिक आँखों से कुछ भी देखने का प्रयास नहीं करते हैं। हम आत्मा की आँख से देखते हैं। इसीलिए, हमें ऊपर की ओर कुछ देखने की कोशिश में अपनी आँखों को माथे की ओर उठाने...
समस्त जीवन की एकता

समस्त जीवन की एकता

समस्त जीवन की एकता संत राजिन्दर सिंह जी महाराज 3 नवम्बर 2020 जब हम ध्यानाभ्यास के द्वारा अंतर में प्रभु के प्रकाश का अनुभव करते हैं, तो हम सभी लोगों में और सभी जीवों में वही प्रकाश देखने लगते हैं। हम जान जाते हैं कि हरेक व्यक्ति महत्त्वपूर्ण है, और सबके अंतर में प्रभु...