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ध्यानाभ्यास के द्वारा अपने जीवन में संतुलन लायें

February 29, 2020

29 फरवरी को संत राजिन्दर सिंह जी महाराज ने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ़ टैक्नोलॉजी (आई.आई.टी.) के दिल्ली कैम्पस में टॉक दी, जिसका विषय था “ध्यानाभ्यास के द्वारा अपने जीवन में संतुलन लायें”। महाराज जी आई.आई.टी. मद्रास के विद्यार्थी रह चुके हैं, जहाँ उन्होंने 1967 में इलैक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में स्नातक डिग्री प्राप्त की थी। महाराज जी की टॉक 1.3 वर्ग किलोमीटर में फैले कैम्पस के डोगरा हॉल में आयोजित की गई थी, जोकि 1100 सीटों वाला थियेटर जैसा हॉल है।

 

पूरी तरह से भरे हुए ऑडिटोरियम को सम्बोधित करते हुए महाराज जी ने हमारे दैनिक जीवन के तनावों और परेशानियों का उल्लेख किया। इन तनाव की जड़ यह है कि हम अपने सच्चे अस्तित्व से, और इस मानव चोले में आने के सच्चे उद्देश्य से, अनजान हैं, उन्होंने समझाया।

 

हम सोचते हैं कि हम शरीर और मन हैं, लेकिन असल में हम आत्मा हैं, परमात्मा का अंश हैं, और यहाँ इसीलिए आए हैं ताकि हम परमात्मा के पास वापस पहुँचने का मार्ग ढूंढ सकें। हम धरती पर ख़ुद को मिले समय को भौतिक धन-संपदा और ज्ञान एकत्रित करने में ही गँवा देते हैं, जबकि अध्यात्म के अमूल्य ख़ज़ाने हमारे भीतर ही दबे पड़े हैं, और इसी प्रतीक्षा में हैं कि हम कब उन तक पहुँचें। ध्यानाभ्यास, या अपने अंतर में जाने की विधि, के द्वारा हम अपने भीतर मौजूद इन ख़ज़ानों तक पहुँच सकते हैं, उन्होंने फ़र्माया।

 

जब हम आंतरिक आध्यात्मिक यात्रा पर जाते हैं, तो हम अपने सच्चे स्वरूप को जान जाते हैं, अपने जीवन में प्रभु की उपस्थिति को अनुभव करने लगते हैं, और इस जीवन के असली उद्देश्य को पहचान जाते हैं। हम देखने लगते हैं कि प्रभु का जो प्रकाश हमारे अंदर चमक रहा है, वही प्रकाश दूसरों के अंदर भी मौजूद है, और फिर हम प्रभु की बनाई समस्त सृष्टि की एकता को दिल से अपना लेते हैं। हमारा द्वैत का भाव ख़त्म हो जाता है, और हम शांति व प्रेम-भाव के साथ ज़िन्दगी गुज़ारने लगते हैं, जो फिर हमारे आसपास के सब लोगों तक भी फैलता जाता है।

 

हमारा दृष्टिकोण ऊँचा हो जाने से हम जीवन की सभी चुनौतियों का सामना शांति और स्थिरता के साथ कर पाते हैं। जब अधिक से अधिक लोग ध्यानाभ्यास के द्वारा अंतर में शांति का अनुभव करने लगेंगे, महाराज जी ने फ़र्माया, तो हम शांति के घेरे बनाते जायेंगे, जो समय के साथ-साथ बढ़ते जायेंगे और एक दिन पूरे विश्व में शांति ले आयेंगे। टॉक के अंत में संत राजिन्दर सिंह जी ने श्रोताओं के अनेक आध्यात्मिक प्रश्नों के उत्तर दिए।